राजभर का अखिलेश पर हमला: सपा के शासन में दलितों पिछड़ों पर अत्याचार का आरोप
राजभर का अखिलेश पर हमला: सपा के शासन में दलितों-पिछड़ों पर अत्याचार का आरोप
NewsPoint•
लखनऊ, 17 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया पर जारी अपनी 'सपा की जातीय हिंसा : पार्ट-3' श्रृंखला में राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में दलितों और अति पिछड़ों पर खूब अत्याचार हुए। उन्होंने कहा कि सत्ता मिलते ही सपा कार्यकर्ताओं ने हिंसा और उत्पीड़न का रास्ता अपना लिया। मंत्री राजभर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि अखिलेश जी, न जाने आपको और आपके स्वजातीय गुंडों को हम अति पिछड़े और दलितों से इतनी चिढ़ क्यों है? जब आप सत्ता में नहीं हैं, तब भी पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा अत्याचार करने वाले आपके लोग ही हैं। अगर गलती से आपको सत्ता मिल गई, तो अपराध का नशा दोगुना हो जाएगा।
राजभर ने मार्च 2012 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जनादेश मिलते ही जैसे आप लोगों पर खून सवार हो गया था। पूरे प्रदेश में आपके गुंडों ने हिंसा का ऐसा नंगा नाच शुरू किया, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भदोही जिला भी आपके उस आतंकराज का गवाह रहा है। जब आपके गुंडे नगर कोतवाली के मकदूमपुर गांव की दलित बस्ती पर कहर बनकर टूट पड़े थे। दलित बस्ती के लोग हाथ-पैर जोड़कर रहम की भीख मांगते रहे, लेकिन आपके बेरहम गुंडे पूरी तरह से सत्ता के नशे में थे। इसी नशे में उन्होंने कई घरों को आग लगाकर राख कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दिया था। बस इतनी सी बात पर आप लोगों ने सत्ता मिलते ही सबसे पहले बहुजनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।मंत्री ने आगे कहा कि मकदूमपुर गांव की दलित बस्ती के घरों को आग के हवाले तो किया ही गया, बहुजन समाज की महिलाओं के साथ भी जमकर बदसलूकी की गई थी। आज भी उस गांव की महिलाएं आपके आतंकराज को याद करके कांपने लगती हैं। राजभर ने कहा कि उन पीड़ितों के घाव पर मरहम लगाने वाला कोई नहीं था। ऐसा इसलिए था क्योंकि पूरा सिस्टम सपा का दफ्तर बन गया था। लखनऊ से इतना दबाव था कि सिर्फ दिखाने के लिए आवेदन लिया गया। एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि बाद में जब हर तरफ थू-थू होने लगी, तो दिल्ली से पीएल पुनिया साहब को भदोही आना पड़ा। राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा कि क्या आपको पिछले सारे कांड याद आ रहे हैं? यही था न आपका आतंकराज। हम पिछड़ों/दलितों का जीवन नरक बनाना, महिलाओं का अपमान करना।
राजभर ने सपा की विचारधारा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शोषणवाद ही आपका 'समाजवाद' है और 'पीट देगा अहिर' ही आपका पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) है। इसलिए राजभर कहता है कि सपा का आना मतलब उत्तर प्रदेश का पश्चिम बंगाल बन जाना। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में जय भारत, जय श्री राम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव का नारा लगाया।
यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट लाएगा। ओमप्रकाश राजभर, जो पहले सपा के साथ गठबंधन में थे, अब भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके ये आरोप सपा और अखिलेश यादव के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। दलितों और अति पिछड़ों के वोटों को लेकर हमेशा से ही राजनीति में अहमियत रही है, और राजभर के ये आरोप सीधे तौर पर इसी वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखे जा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद है कि वे जल्द ही जवाब देंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'सपा की जातीय हिंसा' श्रृंखला आगे क्या मोड़ लेती है और इसका उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। राजभर का यह हमला न केवल अखिलेश यादव पर है, बल्कि यह सपा की नीतियों और उसके शासनकाल के दौरान हुए कथित अत्याचारों पर भी सवाल उठाता है। यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आगामी चुनावों के मद्देनजर और भी तेज होने की संभावना है।