सिएट के शेयर 9% गिरे, जून तिमाही में उच्च लागत से मुनाफा घटा
सिएट के शेयर 9% गिरे, जून तिमाही में उच्च लागत से मुनाफा घटा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। टायर बनाने वाली कंपनी सिएट के शेयर शुक्रवार को 9% से ज्यादा गिर गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनी ने जून तिमाही में खराब नतीजे पेश किए। इसकी वजह बढ़ी हुई लागत है। शेयर बाजार खुलते ही सिएट के शेयर 9.3% गिरकर 3,471.10 रुपये पर आ गए, जबकि पिछली क्लोजिंग 3,829.60 रुपये थी। सुबह 10:47 बजे तक शेयर 7.33% गिरकर 3,548 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 96% की भारी गिरावट दर्ज की। मुनाफा घटकर सिर्फ 4 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 112 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 22.4% बढ़कर 4,318 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 3,529 करोड़ रुपये था। यह दिखाता है कि कंपनी के अलग-अलग बिजनेस में अच्छी मांग है।कंपनी ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे माल की कीमतें बढ़ गईं, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा। कंपनी के एमडी और सीईओ अर्नब बनर्जी ने कहा कि लागत बढ़ने के असर को कम करने के लिए उन्होंने धीरे-धीरे टायरों की कीमतें बढ़ाईं। उन्होंने यह भी कहा कि मांग और बाजार हिस्सेदारी को बनाए रखने की कोशिश की गई। उन्होंने आगे कहा कि दूसरी तिमाही में भी कच्चे माल की कीमतें ऊंची रहने की उम्मीद है।
कंपनी का परिचालन प्रदर्शन भी दबाव में रहा। एबिटा (EBITDA) यानी परिचालन लाभ सालाना आधार पर 5.7% घटकर 365 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 387 करोड़ रुपये था। एबिटा मार्जिन भी घटकर 8.5% हो गया, जो पिछले साल 11% था। एबिटा का मतलब होता है ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा। यह कंपनी के मुख्य बिजनेस से होने वाली कमाई को दिखाता है।
पिछले एक साल में सिएट के शेयरों में करीब 8% की गिरावट आई है। यह शेयर बाजार के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन है। पिछले छह महीनों में शेयर 8% से ज्यादा और इस साल अब तक करीब 6% टूट चुका है।
कंपनी के नतीजों पर विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर टायर कंपनियों पर पड़ रहा है। सिएट के मामले में, यह असर ज्यादा दिखाई दिया है। कंपनी ने लागत को कंट्रोल करने और कीमतें बढ़ाने के कदम उठाए हैं, लेकिन इसका असर नतीजों पर साफ दिख रहा है। आगे चलकर कच्चे माल की कीमतों में नरमी आने पर कंपनी के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि सिएट जैसी कंपनियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। उन्हें लागत प्रबंधन और मांग को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना होगा। कंपनी के एमडी ने भी स्वीकार किया है कि कच्चे माल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, जो भविष्य में भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं।
यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपनी लागत को कैसे मैनेज करती है और टायरों की मांग को कैसे बनाए रखती है। निवेशकों की नजरें कंपनी के अगले नतीजों पर होंगी, जिनसे पता चलेगा कि कंपनी इस मुश्किल दौर से कैसे निकलती है।