एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता, तटीय अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका पर जोर

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत की तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आजीविका सुधारने के लिए एक्वाकल्चर (मछली पालन) क्षेत्र को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के एक्वाकल्चर और तंबाकू उद्योग से जुड़े लोगों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया, जहाँ निर्यात बढ़ाने और किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू, भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा, भाजपा नेता डी. पुरंदेश्वरी, टीडीपी नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायालु और आंध्र प्रदेश के मंत्री के. अच्चन्नायडू, गोट्टीपाटी रवि कुमार और डोला बाला वीरंजनय स्वामी भी शामिल हुए। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी दिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से कई कदम उठाने का आग्रह किया था।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के एक्वाकल्चर और तंबाकू उद्योग से जुड़े लोगों से "सार्थक बातचीत" की। उन्होंने कहा, "हमने भारत की तटीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक्वाकल्चर क्षेत्र को और सशक्त बनाने के अवसरों पर चर्चा की।" गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को उचित मूल्य, बेहतर बाजार पहुंच और निर्यात बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों से आंध्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री ने एक्वाकल्चर को आंध्र प्रदेश के प्रमुख निर्यात केंद्रित क्षेत्रों में से एक बताया और कहा कि यह भारत के सीफूड (समुद्री भोजन) निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों की समस्याओं को उठाया था। मुख्यमंत्री ने बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण किसानों को राहत देने की जरूरत बताई थी।

मुख्यमंत्री नायडू ने गोयल सहित केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने झींगा चारा (फीड) बनाने वाली इकाइयों के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने की मांग की। उनका मानना है कि इससे झींगा पालकों के लिए चारे की लागत कम होगी और कमी दूर होगी। इसके अलावा, उन्होंने घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए फिश मील के निर्यात को विनियमित करने का भी सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने तंबाकू निर्यात पर प्रोत्साहन देने और एक्वाकल्चर से जुड़े प्रमुख इनपुट पर जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) कम करने की भी मांग की। उन्होंने अमरावती में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने का भी आग्रह किया।

पीयूष गोयल को लिखे अपने पत्र में चंद्रबाबू नायडू ने विशेष रूप से फिश मील के निर्यात को नियंत्रित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि "फिश मील के निर्यात को इस तरह नियंत्रित किया जाए कि पहले घरेलू मांग पूरी हो, उसके बाद ही विदेशों में निर्यात की अनुमति दी जाए।" उन्होंने जीएम सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने की मांग को भी दोहराया और कहा कि इससे झींगा पालकों को काफी राहत मिलेगी। इन मांगों से यह स्पष्ट होता है कि आंध्र प्रदेश सरकार अपने किसानों और निर्यातकों के लिए बेहतर माहौल बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है।

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