यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी: सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाज होंगे सैन्य कार्रवाई का निशाना
यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी: सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाज होंगे सैन्य कार्रवाई का निशाना
NewsPoint•
सना, 21 जुलाई: यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि जो भी जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों से व्यापार करेंगे, वे हूती सेना के निशाने पर आ सकते हैं। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
हूती समूह के ‘ह्यूमैनिटेरियन ऑपरेशंस कोऑर्डिनेशन सेंटर’ ने सना से एक ईमेल भेजा है। इस ईमेल में साफ कहा गया है कि यह चेतावनी सिर्फ सऊदी झंडे वाले जहाजों के लिए नहीं है। बल्कि, यह उन सभी जहाजों पर लागू होगी जो सऊदी बंदरगाहों पर सामान लादते या उतारते हैं। इटली की समाचार एजेंसी एडनक्रोनोस के मुताबिक, ईमेल में शिपिंग कंपनियों से कहा गया है कि वे सऊदी बंदरगाहों से जुड़े किसी भी सफर की योजना बनाते समय बहुत सावधान रहें। चेतावनी में यह भी कहा गया है कि ऐसे कारोबारी कामों में शामिल जहाज हूतियों की मारक क्षमता के दायरे में आने पर हमले का शिकार हो सकते हैं।यह नई चेतावनी हूतियों द्वारा सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आई है। इस कदम को कई क्षेत्रीय देशों ने खारिज कर दिया है। कुवैत और कतर जैसे देशों ने हूतियों के इस कदम का विरोध किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री आवाजाही की आजादी का समर्थन किया है। फिलहाल, इन नई घोषणाओं के बाद किसी भी कारोबारी जहाज पर हमले की कोई खबर नहीं आई है।
यह घटनाक्रम हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। इस तनाव की एक बड़ी वजह हूतियों के नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को लेकर विवाद है। 13 जुलाई को सऊदी समर्थित यमनी सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने सना हवाई अड्डे के रनवे पर हमला किया था। उनका कहना था कि यह हमला ईरान से लौट रहे एक विमान को उतरने से रोकने के लिए किया गया था। बताया गया कि उस विमान में हूती नेताओं का एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल था, जो ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन पर आयोजित अंतिम संस्कार से वापस आ रहा था।
हूतियों ने इस हमले का जिम्मेदार सऊदी अरब को ठहराया। इसके जवाब में उन्होंने मिसाइलों और ड्रोन से सऊदी अरब की ओर हमले किए। यह पहली बार नहीं है जब हूतियों ने इस तरह के हमले किए हैं। इससे पहले भी, गाजा युद्ध के दौरान, हूतियों ने इजराइल और अमेरिका से जुड़े होने का आरोप लगाकर कई जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हथियारों से हमले किए थे। इन हमलों के कारण कई शिपिंग कंपनियों को लाल सागर का रास्ता छोड़कर दूसरे रास्तों से जहाजों को भेजना पड़ा। लाल सागर दुनिया के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
इस नए घटनाक्रम से इलाके में समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ सकता है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भी तनाव बना हुआ है। यमन साल 2014 के आखिर से संघर्ष की चपेट में है। उसी समय हूतियों ने राजधानी सना और देश के उत्तरी हिस्से के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया। हाल की घटनाओं ने इस बात की चिंता बढ़ा दी है कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से शुरू हुई तनाव कम करने की कोशिशें अब नाकाम हो सकती हैं।