भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट, सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट, सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली गिरावट
NewsPoint•
मुंबई, 22 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रही। सेंसेक्स 85 अंकों से ज्यादा की मामूली गिरावट के साथ 77,384 पर खुला, जबकि निफ्टी 37 अंकों से ज्यादा गिरकर 24,150 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में मिले-जुले रुझान देखे गए, जहां कुछ सेक्टरों में तेजी थी तो कुछ में गिरावट। ऑटोमोबाइल, डिफेंस, एनर्जी, मेटल, कंजप्शन और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में बढ़त देखी गई। वहीं, फार्मा, हेल्थकेयर, आईटी, पीएसयू बैंक, सर्विसेज, इन्फ्रा, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑयल एंड गैस और मीडिया सेक्टर लाल निशान में थे। शुरुआती कारोबार में लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप शेयरों में भी थोड़ी नरमी दिखी। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 71 अंक गिरकर 62,915 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70 अंक की गिरावट के साथ 19,361 पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स में मारुति सुजुकी, इटरनल, टाइटन, एचयूएल और ट्रेंट जैसे शेयर सबसे ज्यादा चढ़े। वहीं, इंडिगो, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, एसबीआई, सनफार्मा, इन्फोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, एनटीपीसी, बीईएल, एचसीएल टेक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयर सबसे ज्यादा गिरे।
बाजार पर अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव और ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतों का असर दिख रहा है। इन वैश्विक चिंताओं के बावजूद, कुछ क्षेत्रों से अच्छी खबरें आ रही हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर की पहली तिमाही के नतीजे काफी शानदार रहे हैं। कंपनियों के मैनेजमेंट ने भी उम्मीद जगाने वाली बातें कही हैं और निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। जानकारों का मानना है कि प्रमुख बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में जो गिरावट का दौर चल रहा था, वह अब खत्म होने वाला है। इस सेक्टर में अब निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं।एफसीएनआर (विदेशी मुद्रा अनिवासी) डिपॉजिट के जरिए डॉलर के आने की अच्छी खबरों से भारतीय रुपये को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह डॉलर का इनफ्लो 20 अरब डॉलर के पार जा चुका है और आगे इसके और बढ़ने की संभावना है। यह रुपये को स्थिर रखने में मदद करेगा। बाजार में जब भी गिरावट आती है, तो यह मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों को खरीदने का एक अच्छा मौका होता है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में शेयर बाजार में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला कारोबार देखा गया। टोक्यो, शंघाई, सोल और जकार्ता जैसे बाजार हरे निशान में थे, यानी उनमें तेजी थी। वहीं, बैंकॉक और हांगकांग के बाजार लाल निशान में थे, यानी उनमें गिरावट आई। मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार हरे निशान में बंद हुए थे, जो एक सकारात्मक संकेत है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, ऑटोमोबाइल सेक्टर के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। कंपनियों के मैनेजमेंट का कहना है कि वे भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन जारी रखेंगे। निर्यात में वृद्धि भी इस सेक्टर के लिए एक बड़ा सकारात्मक पहलू है।
बैंकिंग सेक्टर में भी सुधार की उम्मीद है। कई बड़े बैंकों के शेयर पिछले कुछ समय से दबाव में थे, लेकिन अब उनमें तेजी आने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि इन शेयरों में निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
डॉलर के इनफ्लो में बढ़ोतरी से भारतीय रुपये को सहारा मिलेगा। यह विदेशी मुद्रा का भारत में आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है और यह रुपये को मजबूत बनाए रखेगा। इससे आयात सस्ता हो सकता है और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
बाजार में गिरावट को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। जिन कंपनियों के फंडामेंटल मजबूत हैं, उनके शेयर खरीदने से लंबी अवधि में अच्छा मुनाफा हो सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में तेजी का रुख रह सकता है।
वैश्विक बाजारों का रुख भी भारतीय बाजार को प्रभावित करता है। एशियाई बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई, जबकि अमेरिकी बाजार सकारात्मक बंद हुए। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन सुधार की उम्मीदें भी हैं।