ईरान के हमलों में 100 अमेरिकी सैनिक घायल, पेंटागन ने स्वीकार की बात

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वाशिंगटन, 21 जुलाई . अमेरिकी रक्षा विभाग, जिसे पेंटागन भी कहते हैं, ने आखिरकार यह मान लिया है कि ईरान के हमलों में उनके 100 सैनिक घायल हुए हैं. पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने खुद यह जानकारी दी. उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर बताया कि ये हमले 7 जुलाई के बाद हुए थे और इनमें से 96 फीसदी सैनिक ठीक होकर वापस ड्यूटी पर भी लौट आए हैं. ज्यादातर सैनिकों को सिर में हल्की चोट लगी थी, जिसे 'कंकशन' कहते हैं. पार्नेल ने यह बात न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कही, जिसमें कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय ईरान के साथ युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की जानकारी छिपा रहा है. पार्नेल ने यह भी कहा कि घायलों से जुड़ी बाकी जानकारी डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (डीसीएएस) पर दी जाएगी.

इस बीच, अमेरिकी सेना में मरने वाले सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. हाल के दिनों में तीन सैनिकों की मौत हुई है. पेंटागन के मुताबिक, शुक्रवार को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक ईरानी हमले में दो सैनिक मारे गए थे. उनकी पहचान सोमवार को सार्वजनिक की गई. फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहान की शुक्रवार को एक कार्रवाई के दौरान मौत हो गई, जबकि प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस शनिवार को मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर हुए ईरानी हमले में मारी गईं.
इसके अलावा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि शनिवार को उत्तरी इराक में एक और अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई. यह घटना तब हुई जब गिराए गए एक ईरानी 'वन-वे अटैक ड्रोन' (ऐसा ड्रोन जो एक ही बार इस्तेमाल किया जा सके) के बिना फटे विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया जा रहा था.

अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ अपने हमले लगातार जारी रखे हुए है. सोमवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे (ईडीटी) अमेरिका ने ईरान पर एक और हवाई हमला किया. यह लगातार 10वां दिन था जब अमेरिकी सेना ने कोई सैन्य कार्रवाई की. पेंटागन के डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम के सोमवार को अपडेट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद से अब तक कुल 427 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में न्यूजनेशन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि मारे गए सैनिकों ने "देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया". उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस सैन्य अभियान का मुख्य मकसद "ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना" है.

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक्स पर कहा, “ये सैनिक 7 जुलाई के बाद हुए हमलों में घायल हुए. इनमें से 96 फीसदी सैनिक ठीक होकर ड्यूटी पर लौट चुके हैं.” उन्होंने बताया कि ज्यादातर को हल्की सिर की चोट (कंकशन) लगी थी. पार्नेल ने यह बयान न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट को शेयर करते हुए दिया, जिसमें दावा किया गया था कि “रक्षा मंत्रालय ईरान के साथ युद्ध में घायल हुए अमेरिकी सैनिकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है.” इसके साथ ही पार्नेल ने दावा किया कि घायलों से संबंधित आगे की जानकारी डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम (डीसीएएस) पर जारी की जाएगी.

अमेरिकी सेना में मृतकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है. हाल के दिनों में तीन सैनिकों की मौत हुई है. पेंटागन के अनुसार, Friday को जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए एक ईरानी हमले में दो सैनिक मारे गए. उनकी पहचान Monday को सार्वजनिक की गई. फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर फीहान की Friday को कार्रवाई के दौरान मौत हुई, जबकि प्राइवेट इसाबेला गोंजालेस Saturday को मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर ईरानी हमले में मारी गईं. वहीं, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि Saturday को उत्तरी इराक में एक अन्य अमेरिकी सैनिक की मौत उस समय हुई, जब गिराए गए ईरानी एकतरफा हमलावर ड्रोन (वन-वे अटैक ड्रोन) के बिना फटे विस्फोटक को नियंत्रित तरीके से निष्क्रिय किया जा रहा था.

अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने हमले जारी रखे हैं. Monday को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे (ईडीटी) अमेरिका ने ईरान पर एक और हवाई हमला किया. यह लगातार 10वां दिन था, जब अमेरिकी सेना ने सैन्य कार्रवाई की. पेंटागन के डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम के Monday को अपडेट किए गए आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बाद से अब तक 427 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं.

इस बीच, अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में न्यूजनेशन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मारे गए सैनिकों ने “देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया”. उन्होंने यह भी दोहराया कि इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य “ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना” है.

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