प्रियांक खड़गे और मोहम्मद नलपाद को RSS पर टिप्पणी के मामले में कोर्ट का समन, 1 अगस्त को पेशी

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बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे और कांग्रेस नेता मोहम्मद नलपाद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ कथित टिप्पणियों के मामले में दूसरी बार समन जारी किया है। दोनों नेताओं को 1 अगस्त को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है। यह समन सिद्धापुरा के निवासी तेजस गौड़ा द्वारा दायर एक निजी शिकायत के बाद जारी किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि खड़गे और नलपाद के बयानों से आरएसएस की छवि खराब हुई है। खड़गे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में और नलपाद ने एक यूट्यूब इंटरव्यू में आरएसएस के खिलाफ अपमानजनक बातें कही थीं।

यह मामला तब और गरमा गया जब प्रियांक खड़गे ने आरएसएस से खुद को रजिस्टर कराने और अपने वित्तीय कामकाज का खुलासा करने की मांग की। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखकर संगठन की स्वायत्तता और फंडिंग में पारदर्शिता पर सवाल उठाए। खड़गे ने यह भी मांग की कि आरएसएस अपनी रजिस्ट्रेशन की स्थिति, संगठनात्मक ढांचे, आय-व्यय के विवरण और संपत्ति को सार्वजनिक करे। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि संगठन के रजिस्टर्ड न होने और 'गुरु दक्षिणा' के जरिए चंदा इकट्ठा करने से उसे टैक्स और वित्तीय जांच से बचने में मदद मिलती है।
इस टकराव ने तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। खड़गे का दावा है कि उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर दलितों को आरएसएस की विचारधारा के अधीन काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।

कोर्ट ने यह नए समन पुलिस की रिपोर्ट के बाद जारी किए हैं। इससे पहले भी दोनों नेताओं को समन भेजा गया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए थे। जज संदीप पाटिल की अध्यक्षता वाली कोर्ट ने अब दोनों नेताओं को आगे की कार्यवाही के लिए 1 अगस्त को कोर्ट में हाजिर रहने का निर्देश दिया है।

शिकायतकर्ता तेजस गौड़ा का तर्क है कि दोनों नेताओं की टिप्पणियों से आरएसएस की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और उन्होंने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला एक निजी शिकायत पर आधारित है, जिसका मतलब है कि यह किसी व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई है, न कि सरकार द्वारा।

प्रियांक खड़गे, जो कर्नाटक के गृह मंत्री हैं, ने आरएसएस के कामकाज पर सवाल उठाकर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। उनकी मांग है कि आरएसएस को भी अन्य संगठनों की तरह अपने वित्तीय मामलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उनका मानना है कि 'गुरु दक्षिणा' के नाम पर चंदा इकट्ठा करना टैक्स चोरी का एक तरीका हो सकता है।

इस पूरे मामले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जहां एक ओर खड़गे आरएसएस पर पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि 1 अगस्त को कोर्ट में क्या होता है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन गया है।

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