Bengaluru अतिक्रमण हटाओ अभियान पर हमला: नगर निगम टीम पर पेपर स्प्रे, 10 हिरासत में

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बेंगलुरु में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम पर मंगलवार को हमला हुआ। कुछ लोगों ने पेपर स्प्रे और हेलमेट से हमला किया, जिससे इलाके में तनाव फैल गया और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। बेंगलुरु शहरी विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने इस हमले की कड़ी निंदा की और हमलावरों को 'गुंडा तत्व' बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना में शामिल हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा।

यह घटना शिवाजीनगर बस टर्मिनल के पास हुई, जहां ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने अभियान में बाधा डाली, नगर निगम कर्मचारियों से मारपीट की और उन पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे क्षेत्र में पहले से घोषणा करने के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया गया था, लेकिन कुछ देर बाद एक समूह ने आकर अधिकारियों पर हमला कर दिया।
बीबीएमपी के एक सुपरवाइजर ने बताया, "हमने सुबह 9 बजे घोषणा के बाद अभियान शुरू किया था। हमें नहीं पता वे लोग कौन थे। उन्होंने हम पर हमला कर दिया और पेपर स्प्रे छिड़क दिया। वरिष्ठ सहायक कार्यकारी अभियंताओं पर भी हमला किया गया।" उन्होंने यह भी बताया कि एक सहायक अभियंता पर हेलमेट से हमला किया गया। अभियान में शामिल जेसीबी चालक ने भी आरोप लगाया कि उसके साथ मारपीट की गई। उसने कहा, "कुछ लोग समूह में आए और मुझसे काम रोकने के लिए कहा। बाद में उन्होंने पेपर स्प्रे किया और वहां से भाग गए।"

अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय संगठनों से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने पहले जीबीए अधिकारियों और पुलिस के साथ तीखी बहस की, जिसके बाद मामला हिंसक हो गया। इस दौरान नगर निगम के इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ को निशाना बनाया गया। शिवाजीनगर पहले से ही सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाका माना जाता है, इसलिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

कुछ समय के लिए अभियान रोक दिया गया, लेकिन बाद में भारी पुलिस सुरक्षा के बीच दोबारा शुरू किया गया। इसके बाद बेंगलुरु पुलिस और जीबीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिवाजीनगर बस स्टैंड के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी की। पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, एक अन्य आरोपी, जिसे कन्नड़ समर्थक संगठन का कार्यकर्ता बताया जा रहा है, फरार है। पुलिस यह जांच कर रही है कि वह मौके पर कैसे पहुंचा और सरकारी अभियान में बाधा डालने में उसकी क्या भूमिका थी।

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा कि आरोपी कोई गरीब लोग नहीं थे जो अपनी आजीविका चला रहे हों, बल्कि असामाजिक तत्व थे जिन्होंने सरकारी कर्मचारियों पर हमला किया। उन्होंने कहा, "सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वाले हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा। मैंने इस संबंध में पुलिस आयुक्त और जीबीए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई Supreme Court के निर्देशों के अनुसार की जा रही है।

मंत्री ने कहा, "Supreme Court के आदेशों को लागू करते समय सरकारी कर्मचारियों पर हमला करना गंभीर अपराध है। कानून के अनुसार अपना कर्तव्य निभाने वाले अधिकारियों के साथ Government मजबूती से खड़ी है। अपने कर्तव्य का पालन कर रहे अधिकारियों पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।" उन्होंने कहा कि वह लगातार जीबीए और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं और पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं। इस मामले में कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जा रही है, और पुलिस आगे की जांच कर रही है।

यह घटना बेंगलुरु के शिवाजीनगर इलाके में हुई, जो पहले से ही सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। मंगलवार को जब नगर निगम की टीम फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। यह हमला पेपर स्प्रे और हेलमेट से किया गया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस घटना के बाद, पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया।

बेंगलुरु शहरी विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने हमलावरों को 'गुंडा तत्व' करार दिया और आश्वासन दिया कि इस मामले में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा। मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह हमला सरकारी कर्मचारियों पर हुआ है, जो कानून के अनुसार अपना काम कर रहे थे।

यह अभियान ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) द्वारा शिवाजीनगर बस टर्मिनल के पास चलाया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने का अभियान सुबह 9 बजे शुरू हुआ था, जिसकी पहले से घोषणा की गई थी। हालांकि, कुछ समय बाद एक समूह ने आकर अभियान में बाधा डाली और नगर निगम कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

बीबीएमपी के एक सुपरवाइजर ने बताया कि हमलावरों ने उन पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और वरिष्ठ सहायक कार्यकारी अभियंताओं पर भी हमला किया। एक सहायक अभियंता को हेलमेट से मारा गया। जेसीबी चालक ने भी मारपीट का आरोप लगाया और कहा कि हमलावरों ने उसे काम रोकने के लिए कहा और फिर पेपर स्प्रे करके भाग गए।

शुरुआत में, स्थानीय संगठनों से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं और जीबीए अधिकारियों व पुलिस के बीच तीखी बहस हुई, जो बाद में हिंसक हो गई। इस दौरान नगर निगम के इंजीनियरों और फील्ड स्टाफ को निशाना बनाया गया।

शिवाजीनगर की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। अतिक्रमण हटाने का अभियान कुछ समय के लिए रोका गया, लेकिन भारी पुलिस सुरक्षा के बीच इसे फिर से शुरू किया गया। अंततः, बेंगलुरु पुलिस और जीबीए के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शिवाजीनगर बस स्टैंड के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी की गई।

पुलिस ने इस मामले में अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया है। एक अन्य आरोपी, जिसे कन्नड़ समर्थक संगठन का कार्यकर्ता बताया जा रहा है, अभी फरार है। पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है कि वह कैसे वहां पहुंचा और उसने सरकारी अभियान में बाधा डालने में क्या भूमिका निभाई।

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पष्ट किया कि हमलावर गरीब लोग नहीं थे जो अपनी आजीविका चला रहे थे, बल्कि असामाजिक तत्व थे। उन्होंने कहा, "सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वाले हर व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा।" उन्होंने पुलिस आयुक्त और जीबीए अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश दिए हैं।

मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई Supreme Court के आदेशों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने कहा, "Supreme Court के आदेशों को लागू करते समय सरकारी कर्मचारियों पर हमला करना गंभीर अपराध है। कानून के अनुसार अपना कर्तव्य निभाने वाले अधिकारियों के साथ Government मजबूती से खड़ी है। अपने कर्तव्य का पालन कर रहे अधिकारियों पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"

मंत्री ने बताया कि वह लगातार जीबीए और पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं और पूरे मामले पर नजर रख रहे हैं। इस घटना के संबंध में कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जा रही है और पुलिस आगे की जांच कर रही है। यह घटना सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और उन पर हमला करने के गंभीर मुद्दे को उजागर करती है।

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