तमिलनाडु में एम सैंड इकाइयों पर कार्रवाई: 200 फैक्ट्रियों का पंजीकरण नवीनीकृत नहीं, सरकार सख्त
तमिलनाडु में एम-सैंड इकाइयों पर कार्रवाई: 200 फैक्ट्रियों का पंजीकरण नवीनीकृत नहीं, सरकार सख्त
NewsPoint•
चेन्नई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद खनिज संसाधन क्षेत्र में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ कमर कस ली है। अचानक हो रहे निरीक्षणों में खनन और मैन्युफैक्चर्ड सैंड (एम-सैंड) उत्पादन से जुड़े नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। राज्य के खान एवं खनिज मंत्री प्रभु खुद कई जिलों में बिना किसी पूर्व सूचना के जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि जो भी खदानें नियमों का उल्लंघन करती पाई जाएंगी, उन्हें तुरंत सील कर दिया जाएगा। सरकार ने अवैध खनन को रोकने में नाकाम रहने या कार्रवाई न करने के शक में खनिज संसाधन विभाग के कई अधिकारियों का तबादला भी कर दिया है। इस सख्ती का असर शुरुआत में एम-सैंड की कीमतों पर भी दिखा, क्योंकि उत्पादकों ने काले ग्रेनाइट की खदानों पर हुई कार्रवाई के चलते उत्पादन प्रभावित होने का बहाना बनाया। हालांकि, खान एवं खनिज मंत्री ने उद्योग संगठनों के साथ बैठक कर उन्हें चेतावनी दी कि वे इस स्थिति का गलत फायदा न उठाएं। इसके बाद एम-सैंड की प्रस्तावित मूल्य वृद्धि को वापस ले लिया गया। इसी बीच, सरकार ने एम-सैंड बनाने वाली फैक्ट्रियों द्वारा किए गए कथित नियम उल्लंघनों की भी गहराई से जांच के आदेश दिए हैं।
भूविज्ञान एवं खनन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एम-सैंड को कड़े काले पत्थरों को तोड़कर और प्रोसेस करके बनाया जाता है। इसे नदी की प्राकृतिक रेत के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि पर्यावरणीय कारणों से नदी की रेत के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा रही है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से निर्माण कार्यों में प्राकृतिक नदी की रेत के टिकाऊ विकल्प के रूप में एम-सैंड के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। अधिकारी ने यह भी बताया कि एम-सैंड बनाने वाली सभी फैक्ट्रियों के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इन रजिस्ट्रेशन को हर तीन से पांच साल में रिन्यू कराना पड़ता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे गुणवत्ता और संचालन संबंधी नियमों का पालन कर रही हैं।तमिलनाडु में फिलहाल 506 रजिस्टर्ड एम-सैंड बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं। लेकिन, हाल ही में रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इनमें से करीब 40 फीसदी फैक्ट्रियों, यानी लगभग 200 फैक्ट्रियों ने अपने रजिस्ट्रेशन को रिन्यू ही नहीं कराया है। अधिकारियों ने यह भी पाया कि इनमें से कई फैक्ट्रियां तीन साल से भी ज्यादा समय से बिना रिन्यू कराए उत्पादन कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस लापरवाही की वजह से निर्माण क्षेत्र में सप्लाई हो रहे एम-सैंड की क्वालिटी और नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। चूंकि ये फैक्ट्रियां बिना अपडेटेड रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं, इसलिए सरकार अब इनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने पर विचार कर रही है। इस मामले पर हाल ही में मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में भूविज्ञान एवं खनन विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक हाई-लेवल मीटिंग भी हुई थी, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, वैध रजिस्ट्रेशन के बिना चल रही एम-सैंड बनाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह कदम राज्य के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को फिर से स्थापित करने के बड़े अभियान का हिस्सा है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सभी खनन गतिविधियां नियमों के दायरे में हों और जनता को अच्छी क्वालिटी का एम-सैंड मिले।
एम-सैंड, जिसे मैन्युफैक्चर्ड सैंड भी कहते हैं, एक तरह की कृत्रिम रेत है। इसे बड़े-बड़े पत्थरों को तोड़कर और पीसकर बनाया जाता है। यह नदी की प्राकृतिक रेत की तरह ही निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होती है। प्राकृतिक रेत के अत्यधिक खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, इसलिए सरकार एम-सैंड को बढ़ावा दे रही है। एम-सैंड बनाने वाली फैक्ट्रियों को सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है और तय नियमों का पालन करना होता है।
सरकार की इस कार्रवाई से यह साफ है कि वह खनिज संसाधनों के अवैध इस्तेमाल को लेकर बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी। अधिकारियों के तबादले और फैक्ट्रियों की जांच से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस क्षेत्र में पूरी तरह से पारदर्शिता और जवाबदेही लाना चाहती है। एम-सैंड की कीमतों में शुरुआती उछाल के बाद सरकार के हस्तक्षेप से स्थिति सामान्य हुई, जो दिखाता है कि सरकार बाजार को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखती है। यह कदम निर्माण उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें अब यह भरोसा रहेगा कि उन्हें मिलने वाला एम-सैंड गुणवत्तापूर्ण और नियमों के अनुसार होगा।