ईरान-अमेरिका तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 87 डॉलर के पार

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नई दिल्ली, 27 जुलाई: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने के बाद सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई। ईरान की ओर से संकेत मिले कि अगर अमेरिका भी सैन्य अभियान रोकता है तो वह आगे कोई हमला नहीं करेगा, जिससे इस संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें बढ़ी हैं। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले तीन हफ्तों में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।

सुबह 10:20 बजे तक, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 4.8% यानी लगभग 4.64 डॉलर टूटकर 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी 5.09% यानी लगभग 4.56 डॉलर गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह बड़ी गिरावट ईरान की ओर से मिले शांति के संकेतों के बाद आई है। ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका भी सैन्य कार्रवाई बंद कर देता है, तो वह आगे कोई हमला नहीं करेगा। इससे पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
बाजार को पहले यह डर सता रहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा शिपिंग मार्गों से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है। ये दोनों मार्ग दुनिया भर में तेल की आवाजाही के लिए बहुत अहम हैं। हालांकि, ईरान के शांति संकेत ने इस डर को कम कर दिया है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान समर्थित हूती बलों द्वारा सऊदी अरब के लाल सागर (Red Sea) स्थित सऊदी अरामको के जिजान और यानबू बंदरगाहों पर हमले का दावा यह दिखाता है कि भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बने हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को कीमतों में तेज गिरावट के बावजूद, इस महीने कच्चे तेल की कीमतें अभी भी लगभग 40% ऊंची हैं। इसका मुख्य कारण आपूर्ति में आने वाली बाधाएं हैं, जो हॉर्मुज स्ट्रेट से बढ़कर लाल सागर तक फैल गई हैं। लाल सागर सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है।

विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम पूरी तरह से खत्म नहीं हुए हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हॉर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही अभी तक सामान्य स्थिति में नहीं लौटी है। इस बीच, सोमवार को भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 41 पैसे की बढ़त के साथ 96.15 पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.56 पर बंद हुआ था। यह मजबूती वैश्विक तेल की कीमतों में आई गिरावट और भू-राजनीतिक तनाव कम होने का असर हो सकती है। तेल की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

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