बेसिक शिक्षा विभाग की ऑनलाइन समीक्षा बैठकें अब सख्त, सहायक शिक्षा निदेशक और बीएसए की अनिवार्य उपस्थिति

NewsPoint
Navbharat Times
लखनऊ, 27 जुलाई। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने अब ऑनलाइन समीक्षा बैठकों को और भी कड़ा बना दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जवाबदेह, अनुशासित और परिणामोन्मुख प्रशासन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब हर ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का शामिल होना अनिवार्य होगा। कोई भी अधिकारी बिना किसी खास वजह के बैठक से गायब नहीं रह सकेगा और न ही किसी और को अपनी जगह भेज सकेगा। शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने इस संबंध में सभी अधिकारियों को साफ-साफ निर्देश जारी कर दिए हैं।

यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है क्योंकि पहले देखा जा रहा था कि कई जिलों से ऑनलाइन समीक्षा बैठकों में उम्मीद के मुताबिक अधिकारी शामिल नहीं हो रहे थे। कई बार तो जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी खुद ही बैठक में नहीं आते थे और न ही किसी बड़े अधिकारी को भेजते थे। विभाग का मानना है कि यह प्रशासनिक जवाबदेही के खिलाफ है। इसलिए, अब यह तय किया गया है कि सभी अधिकारी केवल अपनी सरकारी ई-मेल आईडी से ही बैठक में जुड़ेंगे। इससे यह पता चलेगा कि कौन बैठक में शामिल हो रहा है और पूरी समीक्षा प्रक्रिया और भी पारदर्शी और असरदार बनेगी।
नए नियमों के मुताबिक, हर ऑनलाइन समीक्षा बैठक में मंडल स्तर से सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) और जिला स्तर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को खुद ही भाग लेना होगा। अगर किसी बहुत जरूरी सरकारी काम की वजह से वे खुद नहीं आ पाते हैं, तो वे अपने किसी बड़े मातहत अधिकारी को बाकायदा लिखकर अनुमति देकर बैठक में भेज सकते हैं। इसका मकसद यह है कि किसी भी मंडल या जिले का प्रतिनिधित्व कम न हो।

निर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि एक ही जिले या मंडल से अलग-अलग डिवाइस और अलग-अलग आईडी से बैठक में जुड़ने की इजाजत नहीं होगी। अगर एक से ज्यादा अधिकारियों का आना जरूरी है, तो वे सभी एक ही जगह पर बैठकर एक ही अधिकृत लॉगिन आईडी से बैठक में शामिल होंगे। इससे तकनीकी गड़बड़ियां खत्म होंगी और समीक्षा का काम और भी व्यवस्थित तरीके से होगा।

बेसिक शिक्षा विभाग का मानना है कि जब बड़े अधिकारी खुद बैठकों में शामिल होंगे, तो समीक्षा बैठकों की गुणवत्ता बढ़ेगी। जो भी फैसले लिए जाएंगे, वे समय पर लागू होंगे। साथ ही, सरकार की जो प्राथमिकताएं हैं, उनके हिसाब से योजनाओं की निगरानी और उन्हें लागू करने के काम में और भी तेजी आएगी। यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। यह कदम विभाग को और भी मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रेकमेंडेड खबरें