पेपर लीक, छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई: एनएसयूआई का केंद्र राज्य सरकारों पर हमला
पेपर लीक, छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई: एनएसयूआई का केंद्र-राज्य सरकारों पर हमला
NewsPoint•
नई दिल्ली, 27 जुलाई। एनएसयूआई ने पेपर लीक, छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और बिहार के सिवान में विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित एके-47 फायरिंग की घटना को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। एनएसयूआई अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि उनका संगठन देशभर में पेपर लीक के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रहा है और सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
समाचार एजेंसी से बातचीत में विनोद जाखड़ ने बताया कि एनएसयूआई ने पूरे देश में पेपर लीक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, "जिस दिन नीट पेपर लीक का मामला सामने आया, उसी दिन से एनएसयूआई सड़कों पर प्रदर्शन कर रही थी।" जाखड़ के अनुसार, एनएसयूआई के आंदोलन और विपक्ष के दबाव के बाद ही सरकार ने नीट पेपर लीक की बात स्वीकार की। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कई जगहों पर वॉटर कैनन और लाठीचार्ज किया गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर भी बल प्रयोग हुआ, जबकि बिहार में भी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आईं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।सिवान में छात्र आंदोलन के दौरान एके-47 से फायरिंग की घटना का जिक्र करते हुए जाखड़ ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया। उन्होंने सवाल उठाया, "यदि प्रदर्शनकारी छात्र थे तो उनके खिलाफ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल क्यों किया गया?" उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि इस तरह की कार्रवाई का आदेश किसने दिया। जाखड़ ने कहा कि संबंधित जवान को निलंबित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एक घायल छात्र अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
जाखड़ ने बताया कि देशभर से छात्रों के फोन आ रहे हैं और कई स्थानों पर आंदोलन में शामिल छात्रों एवं उनके परिवारों के साथ कठोर व्यवहार किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस छात्रों के घरों पर दबिश दे रही है और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। एनएसयूआई अध्यक्ष ने बताया कि पटना विश्वविद्यालय के छात्र नेता शांतनु शेखर सहित संगठन के कई कार्यकर्ता जेल में बंद हैं और उनकी रिहाई को लेकर कोई पहल नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान नहीं किया जा रहा है।
इस बीच, उन्होंने घोषणा की कि वह पटना जाकर घायल छात्रों, पीड़ित परिवारों और जेल में बंद कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि एनएसयूआई गिरफ्तार छात्रों की रिहाई, सिवान फायरिंग, पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग की घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज करेगी।
सिवान फायरिंग मामले में सरकार द्वारा संबंधित जवान को निलंबित किए जाने और जांच शुरू होने के सवाल पर जाखड़ ने कहा कि केवल निलंबन से मामले का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि गोली चलाने का आदेश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा, "बिना आदेश के कोई पुलिसकर्मी इस प्रकार की कार्रवाई नहीं करता और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार द्वारा टास्क फोर्स के गठन और एंटी पेपर लीक बिल लाए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल में 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में अब टास्क फोर्स बनाने से पहले पुराने मामलों में कार्रवाई और दोषियों को सजा दिए जाने का जवाब सरकार को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2024 के चर्चित पेपर लीक मामलों की जांच और दोषियों पर हुई कार्रवाई अब तक स्पष्ट नहीं है और सरकार केवल घोषणाएं कर रही है।
जाखड़ ने आगे कहा कि छात्रों को संविधान के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और संगठन इस मुद्दे को लेकर देशभर में अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेपर लीक के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज सुननी चाहिए और उनकी मांगों को पूरा करना चाहिए। एनएसयूआई का मानना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं देश के भविष्य के लिए खतरनाक हैं और इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार दोषियों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक एनएसयूआई का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ इस तरह का व्यवहार करना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को छात्रों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।