एयर इंडिया बोइंग ड्रीमलाइनर हादसे की जांच में देरी नहीं: नागर विमानन मंत्रालय
एयर इंडिया बोइंग ड्रीमलाइनर हादसे की जांच में देरी नहीं: नागर विमानन मंत्रालय
NewsPoint•
नई दिल्ली, 27 जुलाई: केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद को आश्वस्त किया कि अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया बोइंग ड्रीमलाइनर विमान हादसे की जांच में कोई देरी नहीं हुई है। नागर विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना की जांच तय प्रक्रियाओं के अनुसार ही चल रही है और अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मंत्रालय ने बताया कि बड़े विमान हादसों की जांच में कई तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को देखना होता है, जिसमें कई तरह के कारकों की विस्तृत जांच शामिल है। इसलिए, अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, इसकी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई जा सकती। सरकार ने यह भी साफ किया कि दुर्घटना के पीछे के सभी संभावित कारणों और योगदान देने वाले सभी कारकों की व्यापक जांच की जा रही है, जिसका मतलब है कि जांच अभी जारी है और किसी भी संभावित वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
मंत्रालय ने संसद को यह भी जानकारी दी कि जांच के तहत विमान के थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) की सुविधा में विस्तृत जांच की जा रही है। यह प्रक्रिया भी चल रही जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संसद में बताया था कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) 12 जून को हुए एयर इंडिया बोइंग विमान हादसे की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कर रहा है और दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की जांच की जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी, जो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के एनेक्स-13 के प्रावधानों के तहत 12 जून 2026 को अंतरिम बयान भी जारी किया गया। अंतिम जांच रिपोर्ट पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी।यह हादसा 12 जून को हुआ था, जब अहमदाबाद से लंदन-गैटविक जा रही एयर इंडिया की एआई-171 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान, टेकऑफ के महज 35 सेकंड बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस भयानक हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 260 लोगों की जान चली गई थी। इतना ही नहीं, जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। हालांकि, यह एक चमत्कार ही था कि विमान में सवार एक यात्री इस हादसे में बच गया था।
एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान के दोनों इंजनों की शक्ति उस समय समाप्त हो गई थी, जब दोनों फ्यूल कट-ऑफ स्विच 'रन' से 'कटऑफ' स्थिति में चले गए थे। यह एक बहुत ही गंभीर तकनीकी गड़बड़ी थी। हालांकि, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) से एक चौंकाने वाली बात भी सामने आई। सीवीआर से पता चला कि एक पायलट ने दूसरे से कहा था कि उसने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद नहीं किए थे। यह एक विरोधाभासी बयान था। दुर्घटना से ठीक पहले इन स्विचों को फिर से 'रन' स्थिति में लाया गया था, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और विमान को बचाया नहीं जा सका।
केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि एएआईबी की रिपोर्ट केवल प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर न पहुंचें। यह एक संवेदनशील मामला है और जल्दबाजी में कोई भी राय बनाना उचित नहीं होगा। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर काम कर रही हैं।
विमान हादसों की जांच एक जटिल प्रक्रिया होती है। इसमें सिर्फ विमान की खराबी ही नहीं, बल्कि मौसम, मानवीय भूल, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की भूमिका और अन्य कई बाहरी कारकों का भी अध्ययन किया जाता है। यही कारण है कि ऐसे हादसों की जांच रिपोर्ट आने में समय लगता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि बड़े विमान हादसों की जांच में कई तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को देखना होता है। ऐसे मामलों में कई तरह के कारकों की विस्तृत जांच की जाती है, इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट कब तक तैयार होगी, इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। मंत्रालय ने कहा कि किसी बड़े विमान हादसे की जांच पूरी होने का समय पहले से बताना संभव नहीं है।
सरकार ने यह भी बताया कि दुर्घटना के पीछे मौजूद सभी संभावित कारणों और योगदान देने वाले सभी कारकों की व्यापक जांच की जा रही है। इसका मतलब है कि जांच अभी जारी है और अब तक किसी भी संभावित वजह को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
जांच के तहत विमान के थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल की मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) की सुविधा में विस्तृत जांच की जा रही है। थ्रस्ट कंट्रोल मॉड्यूल एक ऐसा हिस्सा होता है जो विमान के इंजनों की शक्ति को नियंत्रित करता है। इसकी जांच यह समझने के लिए की जा रही है कि क्या इसमें कोई खराबी थी या यह ठीक से काम नहीं कर रहा था। यह प्रक्रिया भी चल रही जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इससे पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संसद में बताया था कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) 12 जून को हुए एयर इंडिया बोइंग विमान हादसे की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ कर रहा है और दुर्घटना के सभी संभावित कारणों की जांच की जा रही है। मंत्रालय ने बताया कि एएआईबी ने 12 जुलाई 2025 को दुर्घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी की थी, जो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के एनेक्स-13 के प्रावधानों के तहत 12 जून 2026 को अंतरिम बयान भी जारी किया गया। अंतिम जांच रिपोर्ट पूरी जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सार्वजनिक की जाएगी। यह सब यह दर्शाता है कि जांच प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है।