गुजरात सरकार ने लॉन्च की जहाज निर्माण और मरम्मत नीति 2026, पोरबंदर में बनेगा ग्रीनफील्ड क्लस्टर
गुजरात सरकार ने लॉन्च की जहाज निर्माण और मरम्मत नीति 2026, पोरबंदर में बनेगा ग्रीनफील्ड क्लस्टर
NewsPoint•
गुजरात सरकार ने सोमवार को अपनी ‘जहाज निर्माण और मरम्मत नीति 2026’ लॉन्च की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य की जहाज बनाने की क्षमता को बढ़ाना, निजी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना और एक मजबूत समुद्री विनिर्माण व्यवस्था तैयार करना है। केंद्र सरकार ने पोरबंदर में एक बड़ा ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टर बनाने को मंजूरी दी है, जिससे 27,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की उम्मीद है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में इस नीति का अनावरण करते हुए कहा कि गुजरात की 2,340 किलोमीटर लंबी तटरेखा, बेहतरीन बंदरगाहों और औद्योगिक ताकत का इस्तेमाल करके राज्य को भारत का सबसे बड़ा जहाज निर्माण और मरम्मत केंद्र बनाया जाएगा। यह नीति केंद्र सरकार की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना 2025 (एसबीएफएएस), समुद्री विजन 2047 और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे बड़े लक्ष्यों के साथ गुजरात की समुद्री योजनाओं को जोड़ती है। इसमें नए शिपयार्ड और उनसे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देना, समुद्री उपकरण बनाने को प्रोत्साहित करना, रिसर्च और डेवलपमेंट को मजबूत करना, लोगों को जहाज निर्माण के लिए ट्रेनिंग देना और पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन) और आधुनिक (स्मार्ट) शिपयार्ड बनाने पर जोर दिया गया है।
इस नीति का एक खास प्रस्ताव है एकीकृत मेगा शिपबिल्डिंग पार्क (आईएमएसपी) की स्थापना। इसे एक ऐसी समुद्री औद्योगिक व्यवस्था के रूप में तैयार किया जाएगा जहाँ शिपयार्ड, समुद्री उपकरण बनाने वाले क्लस्टर, टेस्टिंग की सुविधाएँ, सामान लाने-ले जाने की व्यवस्था, रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर और ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट सब एक साथ होंगे। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार ने पोरबंदर जिले के कुच्छड़ी में एक बड़ा ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की मंजूरी दी है। गुजरात मैरीटाइम बोर्ड इस प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। राज्य सरकार के मुताबिक, इस क्लस्टर में दो से तीन विश्व स्तरीय शिपयार्ड होंगे, जिनके साथ कई सहायक उद्योग भी काम करेंगे। इन शिपयार्ड में निजी कंपनियां करीब 23,700 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। वहीं, केंद्र सरकार की जहाज निर्माण विकास योजना (एसबीडीएस) और राज्य सरकार की वित्तीय मदद से करीब 3,300 करोड़ रुपये साझा समुद्री और ज़मीनी इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) बनाने में लगाए जाएंगे। इस साझा इंफ्रास्ट्रक्चर में लहरों से बचाने वाली दीवारें (ब्रेकवाटर), फ्लोटिंग क्रेन, बड़े जहाज, जहाजों को गहरा करने की सुविधा (ड्रेजिंग), बंदरगाह बेसिन का विकास, जहाजों के आने-जाने के रास्ते (नौवहन चैनल), सड़कें, बिजली और पानी की सप्लाई लाइनें और अन्य ज़रूरी सुविधाएँ शामिल होंगी। इसका मकसद निवेशकों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कम करना और प्रोजेक्ट को जल्दी पूरा करवाना है।इस नीति के तहत, निवेश को आकर्षित करने के लिए कई तरह के वित्तीय और गैर-वित्तीय फायदे दिए जाएंगे। इनमें पूंजी सहायता, स्टांप ड्यूटी की वापसी, ब्याज में छूट, ड्रेजिंग में मदद, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से सामान खरीदने पर प्रोत्साहन, बिजली और पानी के बिल में छूट, समुद्री उपकरण बनाने वाले क्लस्टर के लिए खास फायदे और तय समय सीमा के अंदर प्रोजेक्ट शुरू करने वाले निवेशकों को अतिरिक्त लाभ शामिल हैं।
यह नई नीति गुजरात को भारत का प्रमुख जहाज निर्माण और मरम्मत केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। राज्य सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। गुजरात की लंबी तटरेखा और मजबूत औद्योगिक आधार इस क्षेत्र में विकास के लिए बहुत अनुकूल हैं। इस नीति के माध्यम से, राज्य सरकार समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का लक्ष्य रखती है।
यह नीति समुद्री उद्योग में नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देगी। रिसर्च और डेवलपमेंट पर जोर देने से नए और बेहतर जहाज बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, कौशल विकास कार्यक्रमों से स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। ग्रीन और स्मार्ट शिपयार्डों को बढ़ावा देने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। यह नीति भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश को विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना है।
पोरबंदर में बनने वाला मेगा ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर इस नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्लस्टर न केवल बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि समुद्री उपकरणों के निर्माण और मरम्मत के लिए एक हब के रूप में भी काम करेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री उपकरण उपलब्ध होंगे।
यह नीति गुजरात के समुद्री क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगी। यह राज्य को न केवल जहाज निर्माण और मरम्मत में अग्रणी बनाएगी, बल्कि समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा देगी। इससे राज्य के तटीय क्षेत्रों का आर्थिक विकास होगा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।