मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का नशामुक्ति अभियान पर जोर, कांग्रेस की रैली का विरोध
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का नशामुक्ति अभियान पर जोर, कांग्रेस की रैली का विरोध
NewsPoint•
बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंजाब में चलाए जा रहे नशामुक्ति अभियान के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल पंजाब के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए बहुत जरूरी है। मौलाना ने रामलीला मैदान में होने जा रही इंडिया ब्लॉक की रैली के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने त्योहारों के समय में रैली टालने की व्यापारियों की अपील अनसुनी की, जिससे बड़ी आर्थिक हानि हो सकती है।
मौलाना रजवी ने कहा, "भारत के गृह मंत्री ने पंजाब में नशामुक्ति का एक अभियान चला रखा है और यह बहुत जरूरी भी है। इसलिए क्योंकि किसी भी परिवार में अगर कोई बच्चा या नौजवान नशा करने लगता है, तो पूरा परिवार प्रभावित हो जाता है और खुद उसकी सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है।" उन्होंने सभी से अपील की कि नशे के खिलाफ एक अभियान चलाएं। परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों में यह संदेश फैलाएं कि नशा करना ठीक नहीं है और इसे छोड़ दें। नशा जिंदगी को बर्बाद कर देता है और सेहत को भी खतरे में डालता है। मौलाना ने खासकर युवाओं से नशा न करने की अपील की। इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसका ध्यान रखना जरूरी है कि इससे आम जनता को नुकसान न हो। उन्होंने बताया कि दिल्ली के व्यापारियों ने कांग्रेस से गुहार लगाई थी कि रैली कुछ दिनों के लिए टाल दें क्योंकि त्योहारों का समय है। व्यापारियों का कहना था कि इससे उन्हें हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। लेकिन कांग्रेस और इंडिया अलायंस ने उनकी बात को अनसुना कर दिया।
मौलाना ने निराशा जताते हुए कहा कि "अब इससे कितना नुकसान होगा, इसकी भरपाई कौन करेगा?" उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारी सालभर त्योहारों का इंतजार करते हैं कि बाहर से लोग आएंगे और उनकी बिक्री बढ़ेगी। ऐसे में रैली का आयोजन व्यापारियों के लिए आर्थिक संकट का कारण बन सकता है। उन्होंने सवाल किया कि "कौन-सा व्यक्ति या कौन-सी पार्टी इसकी जिम्मेदारी लेगी?" मौलाना ने व्यापारियों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा।
एक और विषय पर मौलाना ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पत्रकार निधि राजदान की शादी पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस्लाम में शादी के लिए कुछ नियम और शर्तें होती हैं। इनमें से एक यह है कि लड़का और लड़की दोनों का मुसलमान होना जरूरी है। अगर इनमें से कोई एक मुसलमान नहीं है, तो निकाह वैध नहीं होता। मौलाना के अनुसार, "जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला साहब मुसलमान हैं और निधि राजदान गैर-मुस्लिम हैं। इसलिए किसी मुसलमान का गैर-मुस्लिम के साथ निकाह नहीं हो सकता।"
उन्होंने यह भी कहा कि "यदि निधि राजदान इस्लाम स्वीकार कर लेतीं और उसके बाद उमर अब्दुल्ला के साथ निकाह होता, तो इसे जायज माना जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।" मौलाना ने स्पष्ट किया कि जब ऐसा नहीं हुआ, तो इस्लाम के दृष्टिकोण से यह निकाह मान्य नहीं होगा।
इस प्रकार मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने नशामुक्ति अभियान और रैली के आयोजन को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने समाज की भलाई के लिए नशे के खिलाफ एक व्यापक मुहिम चलाने का आह्वान किया। इसके साथ ही, व्यापारियों की दुर्दशा और उनके नुकसान के प्रति भी जागरूकता दिखाई। ये मुद्दे समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इस पर चर्चा जारी रहनी चाहिए।