ओडिशा के डीजीपी सुशांत कुमार नाथ पर महिला जेलर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए
ओडिशा के डीजीपी सुशांत कुमार नाथ पर महिला जेलर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए
NewsPoint•
ओडिशा के चौद्वार सर्किल जेल की पूर्व महिला जेलर ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुशांत कुमार नाथ पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह घटना तब हुई जब नाथ, जो पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जेल के पद पर कार्यरत हैं, ने जेल का दौरा किया। आरोपों के कारण ओडिशा सरकार ने उन्हें गृह विभाग में स्थानांतरित करके विशेष कर्तव्य अधिकारी (ओएसडी) बना दिया।
पूर्व महिला जेलर ने अपनी शिकायत में बताया कि नाथ ने 16 जून, 2025 को चौद्वार सर्किल जेल का दौरा किया था। जब वह दौरे के दौरान छुट्टी पर थीं, तो उन्होंने 18 जुलाई, 2025 को डीजीपी (जेल) से फोन पर बात की। शिकायत में कहा गया है कि नाथ ने उनसे अपने मित्र कुलदीप राठा की मुलाकात की व्यवस्था करने को कहा। राठा ने उनसे एक तस्वीर खिंचाने का अनुरोध किया और मुलाकात के बाद उसने उनका मोबाइल नंबर लिया और तस्वीर भेजी। इसके बाद राठा ने उन्हें ऐसे इमोजी वाले संदेश भेजने शुरू कर दिए जो उन्हें आपत्तिजनक लगे।पीड़ित महिला जेलर का कहना है कि नाथ ने राठा के जरिए 29 अगस्त और 25-26 सितंबर 2025 को दो बार उनसे मिलेने का दबाव बनाया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि नाथ के यौन प्रस्तावों को ठुकराने के बाद उन्हें जान से मारने और उनके करियर तथा प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धमकियां मिलीं। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने अनचाहे निमंत्रणों को ठुकराया है, तब से उन्हें डीजीपी (जेल) द्वारा परेशान किया जा रहा है।
पूर्व महिला जेलर ने यह दावा भी किया कि चौद्वार सर्किल जेल से दो कुख्यात अपराधियों के फरार होने की जांच को प्रभावित करने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि नाथ ने जिम्मेदारी दूसरों पर डालने और उन्हें झूठा फंसाने का प्रयास किया।
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए चौद्वार पुलिस ने 31 अक्टूबर, 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75(2) (यौन उत्पीड़न), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 3(5) (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
यह मामला न केवल ओडिशा की जेल व्यवस्था में चर्चाओं का कारण बना है, बल्कि इसने राज्य में यौन उत्पीड़न के मामलों में बढ़ती सख्ती को भी दर्शाया है। सख्त कदमों की यह शुरुआत सच्चाई की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।
यही कारण है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। इसने ओडिशा सरकार के उच्च अधिकारियों को भी सचेत किया है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
आगे क्या होगा, ये देखना दिलचस्प होगा। समाज में ऐसे मामलों को लेकर जागरूकता बढ़ाना और सख्ती से सजा सुनिश्चित करना जरूरी है। सभी की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।