नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भांग की खेती को वैध बनाने के लिए सरकारी कदम उठाने का दिया आदेश
नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने भांग की खेती को वैध बनाने के लिए सरकारी कदम उठाने का दिया आदेश
NewsPoint•
नेपाल में, नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत 1976 से भांग की बिक्री, खेती और सेवन को अपराध माना जाता था। अब, सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए एक नियामक ढांचा तैयार करे। अदालत के इस आदेश से लगभग पांच दशक बाद नेपाल में भांग की खेती और उत्पादन का रास्ता खुल सकता है।
साल 1976 में लागू किए गए नारकोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) एक्ट के तहत भांग की खेती, बिक्री और सेवन करने पर सजा का प्रावधान था। सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल सरकार को तीन महीने के भीतर भांग की खेती और उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए नियम और प्रक्रियाएं तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का यह फैसला 18 मई 2025 को सुनाया गया था, लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण इसका पाठ हाल ही में सार्वजनिक हुआ। यह कमी पिछले साल सितंबर में जेनजी प्रदर्शनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट में लगी आग के कारण हुई थी, जिससे संबंधित दस्तावेज प्राप्त नहीं हो पाए।अदालत ने कहा कि, "1976 का कानून भले ही भांग पर प्रतिबंध लगाता है, लेकिन इसमें औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए नियंत्रित खेती और उत्पादन की कानूनी गुंजाइश भी मौजूद है।" अदालत ने ये भी पाया कि सरकार की ओर से जरूरी नियम और प्रक्रियाएं न होने के कारण भांग की खेती और उत्पादन संभव नहीं हो सका। अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निगरानी और नियामक व्यवस्था बनाने का आदेश दिया है, ताकि औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की व्यावसायिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, उपयोग, बिक्री, वितरण, निर्यात और आयात किया जा सके।
1970 के दशक में इस कानून के लागू होने के बाद लोगों ने कानूनी कार्रवाई के डर से भांग की खेती और उत्पादन से दूरी बना ली। हाल के वर्षों में नेपाल में औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती की अनुमति पर चर्चा तेज हुई है। मार्च 2020 में शेर बहादुर तामांग, जो कि तत्कालीन प्रतिनिधि सभा के सदस्य थे, ने एक निजी विधेयक पेश किया। इस विधेयक में भांग को मुख्य रूप से औषधीय उपयोग और निर्यात के लिए कानूनी बनाने की मांग की गई थी।
इसके तहत लाइसेंस प्राप्त किसानों को भांग उगाने और बेचने की अनुमति देने की बात कही गई। हालांकि, यह विधेयक संसद से पारित नहीं हो सका। फिर भी, इसके तहत किसान स्थानीय सरकार या संबंधित जिला प्रशासन से लाइसेंस प्राप्त कर सकते थे। उन्हें अपनी खेती का क्षेत्र और इसमें शामिल लोगों की जानकारी देनी होती थी और यह सुनिश्चित करना होता था कि इसका दुरुपयोग न हो।
9 जुलाई 2023 को नेपाल के गंडकी प्रांत विधानसभा ने औषधीय और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को लाइसेंस देने का एक विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि 1970 के दशक की शुरुआत तक नेपाल में भांग की खेती और बिक्री कानूनी थी। लेकिन 1960 और 1970 के दशक में पश्चिमी देशों से बड़ी संख्या में हिप्पी नेपाल आने लगे। इसके चलते देश में मारिजुआना और हशीश की मांग में तेजी आई और एक बड़ा बाजार विकसित हो गया।
इस बढ़ते कारोबार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा। कई शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे 'वॉर ऑन ड्रग्स' अभियान के दबाव के कारण नेपाल ने भांग की खेती और बिक्री को अपराध की श्रेणी में रखा। अब स्थिति काफी बदल चुकी है। अमेरिका के कई राज्यों ने औषधीय उपयोग के लिए कैनाबिस को कानूनी मान्यता दी है। कुछ राज्यों में इसे मनोरंजन के लिए भी उपयोग करने की अनुमति है। इसी तरह, दुनिया के कई अन्य देशों ने भी चिकित्सा और मनोरंजन दोनों उद्देश्यों के लिए मारिजुआना को कानूनी दर्जा दिया है।
इस समय, नेपाल में भांग की नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए नए कदम उठाने का रास्ता खुल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह संभव हो सकता है कि नेपाल में भी औषधीय और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भांग की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि देश को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। इस मामले में आगे बढ़ने के लिए नेपाल सरकार को अब तेजी से कदम उठाने होंगे।