डोनाल्ड ट्रंप ने पिकएक्स माउंटेन पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चेतावनी दी, हमले की धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने पिकएक्स माउंटेन पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चेतावनी दी, हमले की धमकी
NewsPoint•
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फ्लोरिडा में ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की तारीफ की, लेकिन इसके साथ ही पिकएक्स माउंटेन का भी जिक्र करते हुए इसके खिलाफ संभावित हमले की धमकी दी। ट्रंप ने बताया कि ईरान के कुछ महत्वपूर्ण परमाणु ठिकानों पर अब भी कार्रवाई करना बाकी है। खासकर उन्होंने पिकएक्स माउंटेन का नाम लेते हुए कहा कि इसे तेजी से निशाना बनाया जा सकता है। उनके इस बयान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी सैन्य रणनीति के बारे में नई चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।
तो पिकएक्स माउंटेन है क्या? यह ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है, जिसे स्थानीय भाषा में 'कूह-ए कोलांग गज ला' कहा जाता है। इसका अंग्रेजी नाम पिकएक्स माउंटेन इसलिए पड़ा क्योंकि 'कोलांग' का मतलब होता है कुदाल। यह स्थान ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों में से एक नतांज के करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। यह पहाड़ तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दूर है। इस पहाड़ के अंदर गहरी सुरंगों का एक जटिल शहर बसाया गया है। इन सुरंगों के दो अलग-अलग प्रवेश मार्ग हैं, जिन्हें सावधानी से पहाड़ के भीतर तराशा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां की भौगोलिक बनावट इसे सामान्य हवाई हमलों से अधिक सुरक्षित बनाती है। सुरंगों की गहराई और मजबूत चट्टानी सुरक्षा के कारण यह ठिकाना निशाना बनाना बहुत कठिन हो सकता है।
पिकएक्स माउंटेन को लेकर पश्चिमी देशों के परमाणु विशेषज्ञ चिंतित हैं। उनकी चिंता इस बात को लेकर है कि कहीं ईरान यहां यूरेनियम संवर्धन का एक ऐसा केंद्र तैयार न कर रहा हो जिसे हवाई हमलों से बचाना आसान हो। यूरेनियम संवर्धन वह प्रक्रिया है, जिसमें सामान्य यूरेनियम को परमाणु ईंधन के लिए तैयार किया जाता है। कम संवर्धित यूरेनियम का उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में होता है, जबकि अधिक संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है। पश्चिमी देशों को डर है कि इस प्रकार की भूमिगत सुविधा ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकती है।
हालांकि, यह पुष्टि नहीं हुई है कि पिकएक्स माउंटेन में वास्तव में यूरेनियम संवर्धन का काम चल रहा है या नहीं। 'इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' के विशेषज्ञ इसकी गतिविधियों पर उपग्रह तस्वीरों के द्वारा नजर रखे हुए हैं। उनकी 16 अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरंगों के प्रवेश मार्गों पर मिट्टी के अवरोध अभी भी हैं। इसका मतलब है कि यहां न तो नियमित गतिविधियां हो रही हैं और न ही बड़ी निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस परिसर में महत्वपूर्ण उपकरण या सामग्री हो सकती है।
इजरायली खुफिया एजेंसियों द्वारा जुलाई में आई एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने पिकएक्स माउंटेन पर सेंट्रीफ्यूज और उसके पुर्जे पहुंचाए हैं। परंतु इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसी कारण माउंटेन के बारे में चर्चा जोरों पर है। अमेरिका का मानना है कि पिकएक्स माउंटेन संभावित सैन्य लक्ष्यों में से एक है।
इस जगह की सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है। अमेरिका के पास जीबीयू-57 जैसे बंकर बस्टर बम हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि इन्हें जमीन के नीचे बने ठिकानों को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गहराई में स्थित ठिकाने को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के माध्यम से सुरंगों के प्रवेश द्वार, बिजली आपूर्ति, वेंटिलेशन और अन्य सहायक ढांचे को तो नुकसान पहुंचाया जा सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि इससे पहाड़ के भीतर मौजूद सभी साधन नष्ट हो जाएं।
अमेरिका के लिए चुनौती सिर्फ ठिकाने को निशाना बनाने की नहीं, बल्कि ये सुनिश्चित करना भी होगा कि वहां मौजूद संभावित परमाणु उपकरण और सामग्री दोबारा उपयोगी न रहें। दिलचस्प बात यह है कि पिकएक्स माउंटेन अब तक नतांज और फोर्दो जैसे अन्य ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद भी चर्चा में बना हुआ है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इसे संभावित सैन्य लक्ष्यों की सूची में रखता है।
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। दूसरी ओर, पश्चिमी देशों को ईरान के यूरेनियम संवर्धन और भूमिगत परमाणु ढांचे को लेकर संदेह है। एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अभी तक इस भूमिगत परिसर का निरीक्षण नहीं किया है। ऐसे में, यह स्पष्ट नहीं है कि वहां क्या उपकरण हैं और उनका क्या उद्देश्य है।
इस विषय पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, और ट्रंप के हालिया बयान ने हालात को और जटिल बना दिया है। EIA और अन्य विशेषज्ञ अब इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं, ताकि यह जान सकें कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम वास्तव में किस दिशा में बढ़ रहा है।