एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक सरकार की सूखा प्रबंधन पर नीति की आलोचना की और केंद्र से मदद की आवश्यकता जताई

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Navbharat Times
बेंगलुरु, 6 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर सूखा प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से मदद मांगने में गंभीर नहीं है। न तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और न ही उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है। वे केवल केंद्र को मुआवजा मांगने वाले पत्र लिखते रहे हैं। कुमारस्वामी ने यह बयान बेंगलुरु में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) परिसर में 71वें कर्नाटक राज्योत्सव समारोह के दौरान दिया।

कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य सरकार ने सूखा राहत के लिए पहले 3,000 करोड़ रुपए मांगे थे, जो बाद में बढ़कर 26,000 करोड़ रुपए हो गए। लेकिन केंद्र से मदद के लिए किसी गंभीर प्रयास का कोई अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा, "राज्य सरकार पिछले दो महीनों से केवल केंद्र को मुआवजा मांगने वाले पत्र लिखती रही है।" दिल्ली में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कदम बिना किसी ठोस प्रयास के उठाया गया है।
कुमारस्वामी ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उन्होंने जब किसानों के लिए 25,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण माफ किए थे, तब उन्होंने केंद्र से आर्थिक सहायता का इंतजार नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैंने व्यक्तिगत रूप से भारत के राष्ट्रपति से मिलकर ऋण राहत अधिनियम को मंजूरी दिलाई थी।" उनके अनुसार, वर्तमान उपमुख्यमंत्री भी उस समय उनकी सरकार का हिस्सा थे।

अशोक में कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई गारंटी योजनाओं पर भी कुमारस्वामी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से जनता पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। जैसे कि महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने के बाद बस किराए में 33 से 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दूध की कीमत में 8 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर भी अपनी राय दी। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि इसका लाभ सीधे किसानों को मिलता है, तो वह इसका स्वागत करेंगे।

इसके अलावा, कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियंक खड़गे द्वारा उन्हें 'गांव का मूर्ख' और 'बुद्धिहीन व्यक्ति' कहे जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, "मैं वास्तव में मूर्ख हूं, क्योंकि मैंने किसानों के 25,000 करोड़ रुपए के कर्ज माफ किए थे।" उन्होंने आगे तंज करते हुए कहा कि "अगर मैं उनकी तरह बुद्धिमान होता, तो उन 25,000 करोड़ रुपए को सड़कों और अन्य विकास कार्यों पर खर्च करता और 30 से 40 प्रतिशत कमीशन भी लेता।"

कुमारस्वामी ने प्रियंक खड़गे को चुनौती दी कि वे अपने आरोप साबित करें। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीति में आने के बाद या मुख्यमंत्री रहते कभी भी रियल एस्टेट का कोई कारोबार नहीं किया। उनके अनुसार, जब वह फिल्म उद्योग से जुड़े थे, तब उन्होंने बिदादी में 45 एकड़ जमीन खरीदी थी।

उन्होंने अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ ट्रस्ट के नाम पर सरकारी जमीन का दुरुपयोग किया गया है। उनका दावा है कि एयरोस्पेस पार्क विकसित करने और कलबुर्गी में स्मारक बनाने के लिए सरकारी भूमि का इस्तेमाल किया गया।

कुमारस्वामी ने प्रियंक खड़गे को सलाह दी कि दूसरों पर आरोप लगाने से पहले उन्हें नैतिक मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में आने से पहले उनकी छवि साफ-सुथरी रही है।

इस प्रकार, कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर तीखे हमले किए और किसानों के मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार से ध्यान खींचने के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि सूखा प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।

कुल मिलाकर, कुमारस्वामी ने यह स्पष्ट किया कि समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है, नहीं तो किसानों की समस्याएं और भी बढ़ सकती हैं।

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