आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू का अमित शाह को पत्र, चक्रवात मुरासु से राहत के लिए मांगी वित्तीय सहायता

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Navbharat Times
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने चक्रवात ‘मुरासु’ से प्रभावित जिलों के लिए राहत पहुंचाने और पुनर्निर्माण में मदद की मांग की है। नायडू ने बताया कि राज्य पिछले एक हफ्ते में लगातार दो चक्रवातों से प्रभावित हुआ है। भारी बारिश और तेज हवाओं के चलते बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि 27 अक्टूबर को आए चक्रवात ‘अरनाब’ से राज्य उबर ही रहा था कि फिर चक्रवात ‘मुरासु’ ने हमला कर दिया। इस वजह से किसान और मछुआरे दोनों को एक ही मौसम में दो बार नुकसान उठाना पड़ा है। नायडू ने पत्र में बताया कि चक्रवातों के कारण राज्य को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, ‘मुरासु’ से 1,919.59 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का व्यापक आकलन किया जाएगा और अगले 15 दिनों के भीतर केंद्र को विस्तृत रिपोर्ट देंगे।” उन्होंने लिखा कि चक्रवात “मुरासु” से 1,43,122 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बर्बाद हुईं, जिससे 1,86,063 किसान प्रभावित हुए हैं। नायडू ने कृषि क्षेत्र में नुकसान का अनुमान 874.96 करोड़ रुपए लगाया।

इसके अलावा, उन्होंने बताया कि बागवानी फसलों को 6,504.38 हेक्टेयर में नुकसान हुआ है। इससे 12,178 किसानों को भी प्रभावित किया है और इसमें 337.10 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। नायडू ने कहा कि पशुपालन, मत्स्य पालन, आवास, सिंचाई, बिजली, पंचायती राज, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से अनुरोध किया कि किसानों, मछुआरों और उन परिवारों की मदद के लिए तुरंत अंतरिम वित्तीय सहायता मंजूर की जाए, जिनके घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य भर में बुनियादी ढांचे और सेवाओं को बहाल करने के लिए भी सहायता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि “केंद्र से मिलने वाली तत्काल सहायता से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी और राज्य को स्थिति सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिलेगी।”

यह स्थिति आंध्र प्रदेश के लिए बहुत चिंताजनक है। लगातार प्राकृतिक आपदाओं ने पहले से ही कमजोर किसानों और मछुआरों को और अधिक संकट में डाल दिया है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इस स्थिति में तेजी से क्या कदम उठाती है।

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