भारतीय रुपए की सबसे बड़ी बढ़त: 93.91 प्रति डॉलर पर बंद, एशिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन

NewsPoint•
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मुंबई, 6 नवंबर: भारतीय रुपया आज शुक्रवार को 12 अक्टूबर के बाद से अपनी सबसे बड़ी बढ़त के साथ 56 पैसे मजबूत होकर 93.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी दिन यह 94.47 पर था। इस दौरान, रुपया कारोबार के दौरान 94.04 तक पहुंच गया, जो कि पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर है। इस हफ्ते रुपया करीब 1.2 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जिससे यह एशिया की सबसे अच्छी प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है।

रुपये की इस तेजी का मुख्य कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लगातार निवेश और कच्चे तेल की कीमतों में कमी मानी जा रही है। इन दोनों कारकों ने रुपये की मांग को बढ़ाया और भारत के आयात बिल पर दबाव कम किया। डीलरों का कहना है कि विदेशी बैंक एफपीआई की ओर से डॉलर बेचने में सक्रिय थे, जो रुपये को और मजबूती देने में मददगार साबित हुआ।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी 93.88 के स्तर पर डॉलर की खरीद जारी रखी, जिससे रुपये की अत्यधिक तेजी को रोकने में मदद मिली। इस बाजार में, विदेशी निवेश के बड़े प्रवाह और तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को मजबूती प्रदान की। विश्लेषकों ने कहा कि "विदेशी निवेश के भारी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपया को मजबूती मिली।"

हालांकि हालिया सुधार के बावजूद, रुपये की लंबी अवधि की स्थिति अब भी कमजोर है। कैलेंडर वर्ष 2026 में अभी तक रुपये में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि पिछले एक साल में यह 5.6 प्रतिशत कमजोर हुआ है। लेकिन चालू वित्त वर्ष में रुपया करीब 1 प्रतिशत बढ़ा है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय रुपया एशिया की अन्य सभी मुद्राओं से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। उनका कहना है, "निकट अवधि में स्पॉट डॉलर के मुकाबले रुपये के नीचे जाने की उम्मीद है। इसके लिए 93.50 पर सपोर्ट और 94.30 पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।"

इस तरह, बाजार में एआई ट्रेड (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निवेश) और भू-Political अनिश्चितताओं में कमी के चलते बाजार का उत्साह काफी बढ़ गया है। कुल मिलाकर, रुपये ने हालिया समय में न केवल मजबूती दिखाई है, बल्कि एशिया में निवेशकों का आकर्षण भी बढ़ाया है।

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