दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप Iii लागू, स्कूलों में क्लास 5 तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में होगी
दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रैप III लागू, स्कूलों में क्लास 5 तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में होगी
NewsPoint•
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को बताया कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए जीआरएपी III लागू कर दिया गया है। इसके तहत, दिल्ली के स्कूलों में कक्षा 5 तक के बच्चों की कक्षाएं ‘हाइब्रिड’ मोड में चलेंगी, यानी फिजिकल और ऑनलाइन दोनों तरीके से। इसके साथ ही, बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल वाहनों के चलने पर पाबंदी लगाई जाएगी। मंत्री ने बताया कि शनिवार से हवा की गति कम होने की आशंका जताई है, जिससे एक्यूआई पर बुरा असर पड़ सकता है। इसीलिए उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ग्रैप III के तहत प्रदूषण से लड़ने में सरकार का साथ दें और आवश्यक नियमों का पालन करें।
एक अधिकारी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि ‘कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट’ (सीएक्यूएम) की उप-समिति ने एहतियात के तौर पर दिल्ली-एनसीआर में ‘स्टेज III’ लागू करने का फैसला लिया है। सीपीसीबी ने 6 नवंबर को एक्यूआई के आंकड़े जारी किए, जिसमें बताया गया कि दिल्ली की हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है और इसका इंडेक्स मान 382 है। यह आंकड़े 57 स्टेशनों से जुटाए गए, जिससे पता चला कि पीएम 2.5 मुख्य प्रदूषक है।जीआरएपी III के तहत, एनसीआर की राज्य सरकारों और जीएनसीटीडी को यह सुनिश्चित करना होगा कि दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के स्कूलों में कक्षा 5 तक के बच्चों की पढ़ाई ‘हाइब्रिड’ मोड में हो। यानी स्कूली पढ़ाई शारीरिक उपस्थिति में और ऑनलाइन दोनों तरीकों से चलानी होगी।
इसके अतिरिक्त, ग्रैप III का आदेश है कि पूरे एनसीआर में स्टोन क्रशर का काम बंद किया जाए और सभी प्रकार की माइनिंग गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। एनसीआर की राज्य सरकारों और जीएनसीटीडी को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल वाहनों को सड़कों से हटाएं। हल्की मोटर गाड़ियों, विशेषकर 4-पहिया वाहनों के लिए यह पाबंदी लागू होगी।
मंत्री ने यह कहा, “यह सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे ग्रैप III के तहत प्रदूषण से लड़ने में सरकार का सहयोग करें।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी, नगर निगम और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम किया जाएगा, जबकि अन्य कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। केंद्रीय सरकार भी इस दिशा में कदम उठा सकती है और अपने कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ की अनुमति दे सकती है।
2 नवंबर को दिल्ली का दैनिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 324 तक पहुंच गया था, जिससे इसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा गया था। इसके चलते सीएक्यूएम ने दिल्ली और पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से ग्रैप II लागू कर दिया था।
इन सभी कदमों का उद्देश्य दिल्ली की प्रदूषण की समस्या को हल करना है। इस प्रदूषण के कारण नागरिकों को काफी परेशानियां हो रही हैं, और अब समय है कि हम सब मिलकर इस पर काम करें। सुखद बात यह है कि सरकार ने इस दिशा में कई उपाय किए हैं। जन जागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही हम अपने वातावरण को बेहतर बना सकते हैं।