सीनेटर क्रिस मर्फी ने यमन में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया, रियाद एयरपोर्ट पर हमले से पहले थे

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Navbharat Times
वॉशिंगटन, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी, जो कनेक्टिकट से डेमोक्रेट नेता हैं, ने हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा रियाद एयरपोर्ट पर किए गए हमले के संदर्भ में महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने इस हमले से एक दिन पहले खुद भी उसी एयरपोर्ट से गुजरने की जानकारी दी। मर्फी ने यमन में किसी भी प्रकार की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने कहा, "हां, मैं हमले से एक दिन पहले उसी एयरपोर्ट पर था। मैं सऊदी और कतर के अधिकारियों से मिलकर आया था, जो इस युद्ध को खत्म कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं।" उनका कहना है कि हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं।

सीनेटर मर्फी ने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। उन्होंने कहा, "गज़गज़ की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह युद्ध आगे बढ़ रहा है।" इस संघर्ष में 12 लोगों की जान जा चुकी है और यह यमन के हूती विद्रोहियों तथा सऊदी अरब के बीच नए संघर्ष की शुरुआत है। जब मर्फी से पूछा गया कि क्या अमेरिका को कोई जवाबी कदम उठाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, "नहीं, मेरा मानना है कि अमेरिका को यमन में युद्ध नहीं करना चाहिए।" उनके अनुसार, यदि अमेरिका युद्ध में शामिल होता है तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है। यह न केवल ईरान के साथ, बल्कि हूती विद्रोहियों के साथ भी टकराव बढ़ा सकता है।
मर्फी ने यह भी कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका युद्ध को समाप्त करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अपनी एकतरफा सैन्य कार्रवाई बंद कर देनी चाहिए और क्षेत्रीय सहयोगियों से यह अपेक्षा करनी चाहिए कि वे लाल सागर और समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

इस हमले में चोटिल हुए भारतीय नागरिकों की बात करें तो रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि इस हमले में 11 भारतीय घायल हुए हैं। इनमें से एक की मौत की पुष्टि भी हुई है। दूतावास ने बताया कि घायलों में से एक भारतीय नागरिक की रविवार को मौत हो गई है। दूतावास का कहना है कि वे पीड़ित परिवार से संपर्क में हैं और मृतक का शव जल्द ही भारत भेजने में मदद करेंगे। इसके अलावा, दूतावास ने कहा कि उनके अधिकारियों ने सभी अस्पतालों का दौरा किया जहां घायल भारतीयों का इलाज हो रहा है। तीन भारतीय आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर है। दो अन्य सामान्य वार्ड में भर्ती हैं जबकि बाकी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।

भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस हमले में भारतीय नागरिक की मौत पर दुख प्रकट किया है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "हम इस घटना पर गहरा अफसोस जताते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय दूतावास पीड़ित परिवार को सभी संभव सहायता प्रदान करेगा। विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि "नागरिकों और नागरिक ढांचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद होना चाहिए।"

सऊदी अरब में भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 27.4 लाख है, जो विदेशों में रहने वाले सबसे बड़े भारतीय समुदायों में से एक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को 'बेहद दुखद घटना' बताया है और कहा कि वे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात करेंगे। हालांकि, रविवार शाम तक दोनों नेताओं के बीच हुई किसी बातचीत की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

ईरान समर्थित हूती विद्रोही, जो उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं, ने सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान के शुरू होने के बाद सऊदी हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल सुविधाओं पर किए गए हमले तेज कर दिए हैं। इस तरह की घटनाएं क्षेत्र के लिए और भी अधिक तनाव का कारण बन रही हैं।

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