गुजरात की दृष्टिबाधित धाविका तेजल डामोर ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में जीता कांस्य पदक

NewsPoint•
2026
गांधीनगर की तेजल डामोर ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। तेजल ने इस प्रतियोगिता में अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया। उनका लक्ष्य अब 400 मीटर टी12 स्पर्धा में सफल होना है, जिसे वह अपनी मुख्य प्रतियोगिता मानती हैं। तेजल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच नितिन चौधरी को दिया, जिनके कठिन परिश्रम और समर्पण ने उनकी उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तेजल डामोर, जो दाहोद जिले की रहने वाली हैं, 24 वर्ष की हैं। वह भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) में प्रशिक्षण लेती हैं। उन्होंने 200 मीटर की हीट में 25.25 सेकंड का समय निकालकर फाइनल में जगह बनाई, जो उनके पिछले रिकॉर्ड 25.47 सेकंड से बेहतर था। तेजल ने कहा, "सबसे पहले मैं अपने कोच को धन्यवाद देना चाहती हूं। इस पदक के पीछे बहुत मेहनत और अनुशासन है। रविवार को आराम का दिन होने के बावजूद मेरे कोच ने प्रशिक्षण में कभी कमी नहीं आने दी। अगर अभ्यास का सत्र तय होता था, तो वह वहां मौजूद रहते थे। मैं सबसे पहले उनका धन्यवाद करना चाहती हूं।"
तेजल ने अपनी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए जोश और दृढ़ संकल्प के साथ कदम बढ़ाया। उन्होंने कहा, "हम यहां बहुत सारी उम्मीदों, कड़ी मेहनत और जीतने के मजबूत संकल्प के साथ आए थे। मेरी यात्रा में काफी संघर्ष रहा है, लेकिन मैंने ठान लिया था कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, मुझे पदक लेकर लौटना है।" इस दृढ़ निश्चय ने उन्हें इस प्रतियोगिता में सफल बनाया।

उनका करियर 2022 में पैरा एथलेटिक्स से शुरू हुआ था। तब से, वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेती आई हैं। उन्होंने 2025 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में छठा स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने 2026 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती और हाल ही में दुबई पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक हासिल किया।

गांधीनगर के साई केंद्र में तेजल को प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सुविधाएं भी मिलती हैं। युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने तेजल को खेल तैयारी के लिए 2,05,961 रुपये की वित्तीय सहायता दी है। यह सहायता उनकी तैयारी को और मजबूती देने में सहायक है। उन्हें इस सहायता से आत्मविश्वास भी मिला है।

तेजल का कहना है कि अब उनकी नजर 400 मीटर टी12 स्पर्धा पर है। यह स्पर्धा उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। तेजल ने कहा, "मेरी मुख्य स्पर्धा 400 मीटर है, जो अब होने वाली है। मेरे कोच और मुझे लगा था कि 200 मीटर में पदक जीतने से 400 मीटर के लिए हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा। अब इस पदक के साथ मैं अपनी मुख्य स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को लेकर और अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रही हूं।"

तेजल सिर्फ अपने व्यक्तिगत करियर तक ही सीमित नहीं रहना चाहतीं। उनका उद्देश्य दाहोद में दृष्टिबाधित बच्चों के लिए एक समर्पित रनिंग ट्रैक बनवाना है। उनका मानना है कि इस तरह की सुविधाएं दृष्टिबाधित बच्चों को एथलेटिक्स में बेहतरी लाने और अपनी खेल प्रतिभा को विकसित करने का अवसर देंगी।

तेजल डामोर की कांस्य पदक की जीत और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन ने उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक नई दिशा दी है। अब वह 400 मीटर टी12 स्पर्धा में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। उनकी कहानी प्रेरणा देती है कि मुश्किलों का सामना करके भी सफलता हासिल की जा सकती है। तेजल की मेहनत और उनके कोच के समर्पण से यह साबित होता है कि जो सपना देखा जाता है, उसे पूरा करने का साहस और मेहनत जरूरी है।

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