India का समर्थन, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के अधूरे काम को जारी रखने की आवश्यकता पर जोर

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भारत ने 22 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में युद्ध अपराधों और नरसंहार की जिम्मेदारी तय करने के लिए बनाए गए दो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों के अधूरे काम को पूरा करने के लिए जरूरी तंत्र को जारी रखने का समर्थन किया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने यह बयान उस समय दिया जब वे इंटरनेशनल रेजिडुअल मैकेनिज्म फॉर क्रिमिनल ट्रिब्यूनल्स (आईआरएमसीटी) पर सभा के सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह तंत्र बाकी काम जारी रखे और इसके तहत पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा, राष्ट्रीय अदालतों की सहायता और न्यायाधिकरणों के अभिलेखों का प्रबंधन महत्वपूर्ण हैं।

मनीष तिवारी ने जोर देते हुए कहा, “ये सभी काम बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे अस्थायी न्यायाधिकरणों की विरासत सुरक्षित रहती है और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलती है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत आईआरएमसीटी के काम को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है और इसके योगदान को भी स्वीकार करता है। यह तंत्र दंड से बचने की प्रवृत्ति के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण है।
आईआरएमसीटी की स्थापना 2010 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने की थी, ताकि रवांडा और पूर्व यूगोस्लाविया के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरणों का अधूरा काम पूरा किया जा सके। रवांडा न्यायाधिकरण ने गृहयुद्ध के दौरान तुत्सी समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार के मामलों की सुनवाई की थी। इस नरसंहार में लगभग 8 लाख तुत्सी लोग और कुछ उदारवादी हूतू लोगों की हत्या हुई थी। वहीं, यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने युद्ध अपराधों से संबंधित मामलों में न्याय दिलाने का कार्य किया था।

यूगोस्लाविया न्यायाधिकरण ने कुल 111 मुकदमे चलाए और 90 लोगों को दोषी ठहराया। इनमें से एक मामले की अपील अभी भी आईआरएमसीटी पर लंबित है। तिवारी ने बताया कि आईआरएमसीटी ने अपने हाथ में कुछ मामलों को लेकर 61 लोगों को दोषी ठहराया है।

उन्होंने कहा कि आईआरएमसीटी अपने कार्यकाल के समापन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में भारत की इच्छा है कि इस प्रक्रिया को व्यवस्थित, प्रभावी और तय समयसीमा के भीतर किया जाए। लेकिन इसमें न्यायिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। तिवारी ने कहा, “पीड़ितों के हितों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।”

इस तरह भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है और इसे संयोजित तरीके से दुनिया के सामने रखा है। मनीष तिवारी ने यह भी कहा कि यह संस्था न्याय, निष्पक्षता, समानता और कानूनी प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुसार अपना काम पूरा करे।

भारत का यह समर्थन निश्चित तौर पर अंतरराष्ट्रीय न्याय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल न्याय की प्रक्रिया को जारी रखेगा, बल्कि उन पीड़ितों के लिए भी उम्मीद का एक प्रकाशस्तंभ बनेगा जिन्होंने अत्याचार का सामना किया है।

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