शी चिनफिंग का बुनियादी अनुसंधान पर लेख: चीन की वैज्ञानिक शक्ति बढ़ाने पर जोर
शी चिनफिंग का बुनियादी अनुसंधान पर लेख: चीन की वैज्ञानिक शक्ति बढ़ाने पर जोर
NewsPoint•
बीजिंग, 15 सितंबर (आईएएनएस)। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के महासचिव शी चिनफिंग ने बुनियादी अनुसंधान को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि यह वैज्ञानिक प्रगति की नींव है, तकनीकी समस्याओं का हल निकालता है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण है। शी चिनफिंग का यह लेख बुधवार, 16 सितंबर को सीपीसी की केंद्रीय समिति की प्रमुख पत्रिका ‘छ्यूशी जर्नल’ के इस साल के 18वें अंक में प्रकाशित होगा। लेख में कहा गया है कि चीन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए अपने बुनियादी अनुसंधान के स्तर को लगातार बढ़ाना होगा। सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस (नवंबर 2012) के बाद से, पार्टी ने बुनियादी अनुसंधान को प्राथमिकता दी है, जिससे सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी अन्य प्रमुख देशों से अंतर है। इसलिए, शी चिनफिंग ने चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया है: समग्र योजना में सुधार, प्रतिभाओं की टीम को मजबूत करना, समर्थन और सुविधाओं को बढ़ाना, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विस्तार करना।
शी चिनफिंग ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि बुनियादी अनुसंधान किसी भी देश की वैज्ञानिक और तकनीकी ताकत का पैमाना है। यह वैज्ञानिक व्यवस्था की रीढ़ है और नई तकनीकों का जन्मस्थान है। आज की दुनिया में, जहां तकनीकी प्रतिस्पर्धा बहुत तेज है, बुनियादी अनुसंधान में पिछड़ना मतलब पीछे रह जाना है। उन्होंने कहा कि सीपीसी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद से, पार्टी ने बुनियादी अनुसंधान पर बहुत ध्यान दिया है। बेहतर योजना, अधिक निवेश और नई व्यवस्थाओं के कारण चीन के बुनियादी अनुसंधान में काफी सुधार हुआ है। लेकिन, शी चिनफिंग ने आगाह किया कि दुनिया की बड़ी वैज्ञानिक शक्तियों की तुलना में अभी भी काफी कमी है। इसलिए, हमें और अधिक मेहनत करनी होगी और ऐसे ठोस कदम उठाने होंगे जो बुनियादी अनुसंधान को और मजबूत करें।इस दिशा में, शी चिनफिंग ने चार मुख्य बातों पर जोर दिया है। पहला, बुनियादी अनुसंधान की पूरी योजना को बेहतर बनाना होगा। आज का युग 'बड़े विज्ञान' का है, जहाँ अनुसंधान को संगठित और प्रबंधित करने का तरीका लगातार बदल रहा है। हमें अपनी राष्ट्रीय जरूरतों और भविष्य की मांगों को ध्यान में रखते हुए, प्रमुख क्षेत्रों और दिशाओं को स्पष्ट रूप से पहचानना होगा। इसके लिए, हमें राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और उच्च स्तरीय विश्वविद्यालयों की भूमिका को और मजबूत करना होगा। ये संस्थान नई राष्ट्रीय व्यवस्था का लाभ उठाकर अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे।
दूसरा, बुनियादी अनुसंधान के लिए योग्य और कुशल लोगों की टीम तैयार करनी होगी। शी चिनफिंग का मानना है कि बुनियादी अनुसंधान का विकास अंततः उच्च स्तरीय प्रतिभाओं पर ही निर्भर करता है। इसलिए, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और प्रतिभा विकास को एक साथ आगे बढ़ाना बहुत जरूरी है। हमें देश में प्रतिभाओं को बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार करना होगा और युवा शोधकर्ताओं को अधिक से अधिक समर्थन देना होगा। उन्हें नई चीजें खोजने और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।
तीसरा, बुनियादी अनुसंधान के लिए आवश्यक समर्थन और सुविधाएं बढ़ानी होंगी। इसका मतलब है कि हमें लंबे समय तक और लगातार निवेश सुनिश्चित करना होगा। बुनियादी अनुसंधान में वित्तीय निवेश का अनुपात बढ़ाना होगा। पैसे जुटाने के नए तरीके खोजने होंगे और शोध की परिस्थितियों को बेहतर बनाना होगा। इसके साथ ही, विज्ञान और प्रौद्योगिकी की व्यवस्था में सुधार करना होगा। एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां लोग खुलकर शोध कर सकें, जहां गलतियों से सीखा जा सके और जहां नई सोच को हमेशा बढ़ावा मिले। एक ऐसी नवाचार संस्कृति विकसित करनी होगी जो खुली, समावेशी हो और जहां असफलता को सीखने का एक हिस्सा माना जाए।
चौथा, बुनियादी अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना होगा। शी चिनफिंग ने कहा कि हमें वैश्विक नवाचार नेटवर्क में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, पर्यावरण, जीवन और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मुद्दों पर मिलकर शोध करना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े वैज्ञानिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेना चाहिए। इससे हम दुनिया भर के वैज्ञानिकों से सीख सकेंगे और अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ पाएंगे।
अंत में, शी चिनफिंग ने इस बात पर जोर दिया कि बुनियादी अनुसंधान को मजबूत करने के लिए पूरी पार्टी और समाज को मिलकर प्रयास करना होगा। सभी स्तरों की पार्टी समितियों और सरकारों को नीतियों का समर्थन बढ़ाना होगा। उन्हें आवश्यक सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करनी होंगी ताकि केंद्रीय समिति के फैसलों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। यह एक सामूहिक प्रयास है जिसमें सभी को अपना योगदान देना होगा। (साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) --आईएएनएस एबीएम/