समान नागरिक संहिता पर अमित शाह के बयान के बाद Nda में गरमाई चर्चा, Jdu और शिवसेना की प्रतिक्रियाएं
समान नागरिक संहिता पर अमित शाह के बयान के बाद NDA में गरमाई चर्चा, JDU और शिवसेना की प्रतिक्रियाएं
NewsPoint•
नई दिल्ली, 15 सितंबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर दिए बयान के बाद एनडीए के सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर गरमागरम बहस छिड़ गई है। जहां महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता में काबिज शिवसेना ने अमित शाह के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे देश की जरूरत बताया है, वहीं बिहार में एनडीए की सहयोगी जदयू का कहना है कि यूसीसी के प्रावधानों और उसके स्वरूप की पूरी जानकारी मिलने के बाद ही वे अपना रुख तय करेंगे। इस बीच, भाजपा के नेता यूसीसी को देश के लिए आवश्यक बताते हुए इसे लागू करने की वकालत कर रहे हैं, जबकि कुछ अन्य दलों ने इसके राज्य-दर-राज्य लागू होने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने यूसीसी को लेकर कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यूसीसी में क्या प्रावधान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूसीसी बिल किस रूप में आता है, पहले उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि प्रावधानों को देखने के बाद इस संबंध में सीधे गृह मंत्री से चर्चा की जाएगी। इसके बाद पार्टी बैठक करेगी और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। इसलिए, अभी बिल का प्रारूप आने दीजिए। इसके संबंध में पार्टी में भी चर्चा होगी और घटक दलों के साथ भी चर्चा होगी। अभी तो प्रावधान भी नहीं देखे गए हैं और न ही इस पर पार्टी में कोई बात हुई है। अगर यूसीसी में कोई परेशानी होगी तो सीधे गृह मंत्री से बात की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी हम प्रावधान ही नहीं जानते, तो उस पर स्टैंड कैसे लें? स्टैंड किसी चीज को समझने के बाद लिया जाता है। चीजें जब आएंगी, उन्हें देखेंगे। हम भी चाहेंगे कि बिल ऐसा हो, जिसमें सभी के लिए बात हो। हम बता चुके हैं कि हमें कुछ अलग लगेगा तो हमारे कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा है कि वह सीधे गृह मंत्री से बात करेंगे। अभी हड़बड़ी की बात क्या है।बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने गृह मंत्री अमित शाह के 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के ऐलान पर कहा कि यूसीसी थोड़ा संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने जो बात कही है, वह ठीक है। हम लोग बात कर रहे हैं, पूरी तरह से चर्चा करेंगे। बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि एक बार जब हम प्रस्ताव देख लेंगे, तो उस पर टिप्पणी करेंगे।
जम्मू-कश्मीर में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने यूसीसी को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा 12 साल से पूरे देश को भी संभाल रही है और आज देश जिस तीव्र गति से ऊंचाइयों को छू रहा है, वह दुनिया जानती है। इसमें उमर अब्दुल्ला के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। उमर अब्दुल्ला साहब जिस विचार से आते हैं, जिस पार्टी से आते हैं, वहां समानता नाम की कोई चीज नहीं है। इसलिए उनको पेट दर्द होना स्वाभाविक है। भारतीय जनता पार्टी इस पर अटूट विश्वास रखती है कि इंडिया में रहने वाले सभी नागरिक एक समान हैं। इसलिए हम यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करते हैं।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि अमित शाह पिछले दिनों मुंबई आए थे और उन्होंने मुंबई में एक चर्चा के दौरान बहुत साफ-साफ शब्दों में घोषणा की है कि इस समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और एनडीए की गवर्नमेंट है और इन तमाम राज्यों में धीरे-धीरे 2029 आते-आते कॉमन सिविल कोड पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। शिवसेना गृह मंत्री के इस बयान का पूरा समर्थन करती है। हम चाहते हैं कि कॉमन सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता पूरे देश में हो। ऐसा सुनने में आ रहा है कि संभवतः बिहार में भाजपा का सहयोगी दल जदयू है और उसको थोड़ा सा ऐतराज है। मैं जदयू को बताना चाहूंगा कि कॉमन सिविल कोड किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। कॉमन सिविल कोड बुनियादी तौर पर धर्म के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए एक व्यापक व्यवस्था है।
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने यूसीसी पर कहा कि देश का कानून पहले से ही संहिताबद्ध है। चाहे सिविल लॉ हो या क्रिमिनल लॉ, एक ही कानून है। एक ही यूसीसी कानून है जो इनको पूरे देश में लागू करना था। यह जो राज्य-दर-राज्य करने जा रहे हैं, यह यूसीसी नहीं है। यह राज्य एक कानून को अपना रहा है। आपको अपने राज्य में कानून लगाना है, आप लगाइए, किसने रोका है? उसका आप 2029 तक इंतजार क्यों करते हैं? यह यूसीसी थोड़ी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि यह जरूर होगा। गृह मंत्री ने आदेश दे दिया है। हमारी गवर्नमेंट इसी के मुताबिक काम कर रही है। मुख्यमंत्री पहले ही एक कमेटी बना चुके हैं और वह कमेटी सभी से बातचीत कर रही है। यूसीसी सभी के लिए जरूरी है, क्योंकि संविधान का मूल सिद्धांत कहता है कि यह देश और इसका संविधान किसी भी नागरिक के साथ जाति, पंथ या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। हालांकि अब तक भेदभाव होता रहा है। इसलिए जितनी जल्दी यह भेदभाव खत्म हो जाए, उतना ही अच्छा है।
भाजपा विधायक आर.एस. पठानिया ने कहा कि यूसीसी को लेकर सामान्य तौर पर एक धारणा है कि इससे एक ही धर्म हो जाएगा। ऐसा नहीं है। आज ट्रिपल तलाक पर Prime Minister जी कानून लाए, मेंटेनेंस पर कानून लाए। हर किसी के पर्सनल लॉ, चाहे वह इस्लामिक लॉ हो, हिंदू लॉ हो या स्पेशल मैरिज एक्ट हो, उसमें सुधार करना और उसे एक प्लेटफॉर्म पर लाना इसका उद्देश्य है।
भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि यह बेहतरीन निर्णय है और देश के गृह मंत्री का कहना कोई साधारण बात नहीं है। यह सबसे स्वागत योग्य कदम है कि देश के 21 राज्यों में यूसीसी लागू होने वाला है।
यूसीसी पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि क्या अब हम कुछ भी करने से पहले उमर अब्दुल्ला साहब से पूछेंगे? भारतीय जनता पार्टी की 21 राज्यों में गवर्नमेंटें और हमारे मुख्यमंत्री हैं और चार राज्यों में हम गठबंधन गवर्नमेंटों का हिस्सा हैं। इसे लागू करने से पहले हम उमर अब्दुल्ला साहब से नहीं पूछने वाले हैं। अगर राज्य इसे लागू करना चाहते हैं और इसे अमल में ला रहे हैं, तो उमर अब्दुल्ला को इससे क्या परेशानी है।
गृह मंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर दिए बयान के बाद देश भर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। शाह ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में देश के 21 राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा। इस बयान पर एनडीए के सहयोगी दलों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ दल इसे देश की जरूरत बताकर समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ दल अभी प्रावधानों का इंतजार कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता में शामिल शिवसेना ने अमित शाह के यूसीसी से जुड़े बयान का पुरजोर समर्थन किया है। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि अमित शाह ने मुंबई में साफ-साफ कहा है कि देश के 21 राज्यों में भाजपा और एनडीए की सरकारें हैं और इन सभी राज्यों में धीरे-धीरे 2029 तक कॉमन सिविल कोड पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। शिवसेना गृह मंत्री के इस बयान का पूरा समर्थन करती है और चाहती है कि कॉमन सिविल कोड पूरे देश में लागू हो। निरुपम ने जदयू को संबोधित करते हुए कहा कि कॉमन सिविल कोड किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह धर्म के नाम पर महिलाओं और समाज के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने के लिए एक व्यापक व्यवस्था है।
वहीं, बिहार में एनडीए की सहयोगी जदयू ने यूसीसी पर अपना रुख स्पष्ट करने से पहले प्रावधानों का इंतजार करने की बात कही है। बिहार के उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यूसीसी में क्या प्रावधान किए जा रहे हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। यूसीसी बिल किस रूप में आता है, पहले उसके प्रावधानों का अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि प्रावधानों को देखने के बाद इस संबंध में सीधे गृह मंत्री से चर्चा की जाएगी। इसके बाद पार्टी बैठक करेगी और विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी बिल का प्रारूप आने दीजिए, उसके बाद पार्टी में और घटक दलों के साथ चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि अभी हम प्रावधान ही नहीं जानते, तो उस पर स्टैंड कैसे लें? स्टैंड किसी चीज को समझने के बाद लिया जाता है। चीजें जब आएंगी, उन्हें देखेंगे। हम भी चाहेंगे कि बिल ऐसा हो, जिसमें सभी के लिए बात हो। हम बता चुके हैं कि हमें कुछ अलग लगेगा तो हमारे कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा है कि वह सीधे गृह मंत्री से बात करेंगे। अभी हड़बड़ी की बात क्या है।
बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने भी यूसीसी को एक संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने जो बात कही है, वह ठीक है। उन्होंने कहा कि वे लोग बात कर रहे हैं और पूरी तरह से चर्चा करेंगे। मंत्री दीपक प्रकाश ने भी कहा कि एक बार जब प्रस्ताव देख लिया जाएगा, तो उस पर टिप्पणी की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने यूसीसी को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा 12 साल से पूरे देश को संभाल रही है और देश आज जिस तीव्र गति से ऊंचाइयों को छू रहा है, वह दुनिया जानती है। इसमें उमर अब्दुल्ला के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। शर्मा ने कहा कि उमर अब्दुल्ला जिस विचार और पार्टी से आते हैं, वहां समानता नाम की कोई चीज नहीं है, इसलिए उन्हें पेट दर्द होना स्वाभाविक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी का अटूट विश्वास है कि भारत में रहने वाले सभी नागरिक एक समान हैं, इसलिए वे यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करते हैं।
आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने यूसीसी के राज्य-दर-राज्य लागू होने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश का कानून पहले से ही संहिताबद्ध है, चाहे सिविल लॉ हो या क्रिमिनल लॉ, एक ही कानून है। एक ही यूसीसी कानून है जो इन्हें पूरे देश में लागू करना था। उन्होंने कहा कि यह जो राज्य-दर-राज्य करने जा रहे हैं, यह यूसीसी नहीं है। यह राज्य एक कानून को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी राज्य को अपने यहां कानून लगाना है, तो वह लगाए, किसने रोका है? उन्होंने सवाल उठाया कि फिर 2029 तक इंतजार क्यों करते हैं? यह यूसीसी थोड़ी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने यूसीसी के लागू होने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यह जरूर होगा क्योंकि गृह मंत्री ने आदेश दे दिया है और सरकार इसी के मुताबिक काम कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही एक कमेटी बना चुके हैं और वह कमेटी सभी से बातचीत कर रही है। मजूमदार ने यूसीसी को सभी के लिए जरूरी बताया, क्योंकि संविधान का मूल सिद्धांत कहता है कि यह देश और इसका संविधान किसी भी नागरिक के साथ जाति, पंथ या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अब तक भेदभाव होता रहा है, इसलिए जितनी जल्दी यह भेदभाव खत्म हो जाए, उतना ही अच्छा है।
भाजपा विधायक आर.एस. पठानिया ने यूसीसी को लेकर आम धारणा को दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लेकर सामान्य तौर पर एक धारणा है कि इससे एक ही धर्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि आज ट्रिपल तलाक पर Prime Minister जी कानून लाए, मेंटेनेंस पर कानून लाए। उन्होंने कहा कि हर किसी के पर्सनल लॉ, चाहे वह इस्लामिक लॉ हो, हिंदू लॉ हो या स्पेशल मैरिज एक्ट हो, उसमें सुधार करना और उसे एक प्लेटफॉर्म पर लाना इसका उद्देश्य है।
भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने यूसीसी को एक बेहतरीन निर्णय बताया और कहा कि देश के गृह मंत्री का कहना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने इसे देश के 21 राज्यों में यूसीसी लागू होने की दिशा में एक सबसे स्वागत योग्य कदम बताया।
यूसीसी पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब हम कुछ भी करने से पहले उमर अब्दुल्ला साहब से पूछेंगे? उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की 21 राज्यों में गवर्नमेंटें हैं और हमारे मुख्यमंत्री हैं, और चार राज्यों में हम गठबंधन गवर्नमेंटों का हिस्सा हैं। इसे लागू करने से पहले हम उमर अब्दुल्ला साहब से नहीं पूछने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अगर राज्य इसे लागू करना चाहते हैं और इसे अमल में ला रहे हैं, तो उमर अब्दुल्ला को इससे क्या परेशानी है।
कुल मिलाकर, अमित शाह के यूसीसी पर बयान ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें राजनीतिक दल अपने-अपने रुख स्पष्ट कर रहे हैं। जहां भाजपा और शिवसेना इसे देश की जरूरत बता रहे हैं, वहीं जदयू जैसे दल प्रावधानों का इंतजार कर रहे हैं, और आम आदमी पार्टी जैसे दल इसके लागू होने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। यह मुद्दा आने वाले समय में और भी गरमाएगा।