गणेश उत्सव: लालबागचा राजा को रिकॉर्ड दान, एफडीए ने खाद्य सुरक्षा पर आयोजित कीं वर्कशॉप

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Navbharat Times
मुंबई, 15 सितंबर: गणेश उत्सव के पहले दिन मुंबई में श्रद्धालुओं ने लालबागचा राजा को 48.50 लाख रुपये का दान दिया, जिसमें स्टेज बॉक्स में 27.50 लाख और कलर बॉक्स में 21 लाख रुपये शामिल थे। यह पिछले साल के 46 लाख रुपये से अधिक है। इसी बीच, ग्रेटर मुंबई के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने गणेश मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु पांच जागरूकता वर्कशॉप आयोजित कीं, जिनमें 320 लोगों ने भाग लिया। एफडीए ने बीएमसी के साथ मिलकर 110 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए 'मोदक की मिठास, खाद्य सुरक्षा का भरोसा' नामक एक विशेष सत्र भी आयोजित किया, जिसमें मोदक बनाने वालों को खाद्य सुरक्षा के नियमों और अच्छी स्वच्छता प्रथाओं के बारे में बताया गया। महाप्रसाद बांटने वाले मंडलों को भी निर्देश दिए गए कि वे संबंधित वेबसाइट पर फॉर्म भरकर जमा करें और खाने की चीजें केवल लाइसेंस प्राप्त जगहों से ही खरीदें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गणेशोत्सव के दौरान भक्तों को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना है।

पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम मची हुई है और मुंबई भी इससे अछूता नहीं है। गणेश उत्सव के पहले दिन, मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के चरणों में भक्तों ने दिल खोलकर दान दिया। कुल 48 लाख 50 हजार रुपये का चढ़ावा आया, जिसमें स्टेज बॉक्स में 27 लाख 50 हजार रुपये और कलर बॉक्स में 21 लाख रुपये शामिल थे। यह पिछले साल के पहले दिन के 46 लाख रुपये के दान से ज्यादा है, जो भक्तों की श्रद्धा और उत्साह को दर्शाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा रहा है। ग्रेटर मुंबई के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) ने गणेश मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के लिए विशेष जागरूकता वर्कशॉप का आयोजन किया। कुल पांच वर्कशॉप अलग-अलग जगहों पर हुईं, जिनमें गणेश मंडलों के 320 पदाधिकारियों और अन्य संबंधित संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इन वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि गणेशोत्सव के दौरान भक्तों को मिलने वाला प्रसाद और भोजन सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता वाला हो।

खास तौर पर, एफडीए ने बीएमसी के साथ मिलकर 110 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए 'मोदक की मिठास, खाद्य सुरक्षा का भरोसा' नाम से एक वर्कशॉप आयोजित की। यह सत्र उन लोगों के लिए था जो मोदक बनाने का काम करते हैं। इस दौरान, आयुक्त (खाद्य) और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने उपस्थित लोगों को खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के 'शेड्यूल 4' के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने 'अच्छी स्वच्छता प्रथाओं' (जीएचपी) यानी साफ-सफाई के नियमों और 'अच्छी निर्माण प्रथाओं' (जीएमपी) यानी अच्छी तरह से चीजें बनाने के तरीकों पर विशेष जोर दिया।

इसके अलावा, महाप्रसाद बांटने वाले मंडलों के लिए भी खास निर्देश जारी किए गए। सभी गणेश मंडलों को यह निर्देश दिया गया कि वे भंडारा, महाप्रसाद और खाने की दूसरी चीजें बांटने से पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म/अपेंडिक्स-सी को भरकर अपने ऑफिस में जमा करें। यह एक तरह की अनुमति प्रक्रिया है ताकि वितरण को व्यवस्थित और सुरक्षित रखा जा सके।

खाने की चीजों की खरीद को लेकर भी सख्त हिदायत दी गई है। मंडलों को कहा गया है कि वे खाने की चीजें केवल लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन वाली जगहों से ही खरीदें। साथ ही, खरीद का सही बिल और अन्य दस्तावेज भी अपने पास रखें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि इस्तेमाल होने वाली सामग्री गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित है।

वर्कशॉप में मौजूद लोगों को खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई के बारे में जरूरी सावधानियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। उन्हें समझाया गया कि कैसे छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर बड़ी दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।

इस पूरी पहल का मुख्य मकसद यह पक्का करना था कि गणेशोत्सव के दौरान भक्तों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का खाना मिले। 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यही है कि लोगों को पौष्टिक, बिना मिलावट वाला और सुरक्षित खाना मिले। महाराष्ट्र राज्य का 'फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन' इस दिशा में लगातार काम कर रहा है ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

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