ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान पर 38 अरब डॉलर खर्च, मिसाइल भंडार में कमी और महंगाई पर असर
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान पर 38 अरब डॉलर खर्च, मिसाइल भंडार में कमी और महंगाई पर असर
NewsPoint•
वॉशिंगटन, 16 सितंबर: अमेरिकी कांग्रेसनल बजट ऑफिस (सीबीओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों पर जुलाई तक करीब 38 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे. यह खर्च लगातार बढ़ रहा है और हर महीने 2 से 3 अरब डॉलर और लग सकते हैं. इस युद्ध ने अमेरिका के मिसाइल-रक्षा भंडार को काफी कम कर दिया है, ऊर्जा की कीमतें बढ़ा दी हैं और देश की अर्थव्यवस्था में महंगाई को भी हवा दी है. सीबीओ ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था, के सैन्य, लॉजिस्टिक और आर्थिक पहलुओं का गहन अध्ययन किया. यह अभियान 8 अप्रैल को युद्धविराम तक चला, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 जुलाई को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमलों का हवाला देते हुए युद्धविराम समाप्त कर दिया.
कुल 38 अरब डॉलर के अनुमानित खर्च में से एक बड़ी रकम, 21.7 अरब डॉलर, मिसाइलों और अन्य हथियारों को फिर से खरीदने या बदलने पर खर्च हुई. इसके अलावा, 10.4 अरब डॉलर अतिरिक्त उड़ान घंटों पर, 2.7 अरब डॉलर सैन्य ईंधन की बढ़ी हुई लागत पर, 1.9 अरब डॉलर युद्ध में नष्ट हुए उपकरणों पर और 1.5 अरब डॉलर अन्य सैन्य अभियानों पर खर्च हुए. सबसे ज्यादा पैसा इस्तेमाल हो चुके हथियारों को फिर से भरने में लगा. इसमें 13.1 अरब डॉलर मिसाइल-रक्षा इंटरसेप्टरों पर और 7.3 अरब डॉलर जमीन पर हमला करने वाली क्रूज मिसाइलों पर खर्च हुए.यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस 38 अरब डॉलर के अनुमान में ईरानी हमलों से क्षतिग्रस्त हुए अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण की लागत शामिल नहीं है. साथ ही, कूटनीतिक गतिविधियों, विदेशी सहायता, और घायल सैनिकों व पूर्व सैनिकों के लंबे समय तक चलने वाले इलाज और विकलांगता मुआवजे का खर्च भी इसमें नहीं जोड़ा गया है. सीबीओ ने यह भी बताया कि पेंटागन ने उन्हें वह सारी जानकारी नहीं दी जिसकी उन्हें जरूरत थी. इसलिए, उन्हें सरकारी डेटाबेस और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों पर निर्भर रहना पड़ा, जिसके कारण उनके अनुमानों में "काफी अनिश्चितता" हो सकती है.
रिपोर्ट में एक गंभीर चेतावनी दी गई है कि जून 2025 के बाद से अमेरिका अपने मिसाइल-रक्षा इंटरसेप्टर भंडार का लगभग आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल कर चुका हो सकता है. सीबीओ ने कहा, "रक्षा विभाग यह नहीं बताता कि उसके पास कितने हथियार मौजूद हैं. लेकिन मिसाइल-रक्षा इंटरसेप्टरों के इस्तेमाल की जानकारी की तुलना अब तक खरीदे गए कुल हथियारों से करने पर लगता है कि जून 2025 के बाद से अमेरिका अपने भंडार का लगभग आधा से दो-तिहाई हिस्सा इस्तेमाल कर चुका है." इसका मतलब है कि अगर भविष्य में किसी ऐसे देश से संघर्ष होता है जिसके पास बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं, तो यह कमी एक बड़ी समस्या बन सकती है.
यहां तक कि अगर पेंटागन खरीद प्रक्रिया को तेज भी कर दे, तब भी इन हथियारों के भंडार को फिर से भरने में कम से कम पांच साल लग सकते हैं. रिपोर्ट में विशेष रूप से चीन का उल्लेख किया गया है, यह बताते हुए कि ताइवान से जुड़े किसी संभावित सैन्य संघर्ष में चीन के विशाल मिसाइल भंडार की बड़ी भूमिका हो सकती है.
इस युद्ध का असर सिर्फ सैन्य भंडार पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर भी इसका गहरा असर हुआ है. होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर (रेड सी) के रास्तों में रुकावटों के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. सीबीओ के अनुसार, इससे 2026 की दूसरी तिमाही में वार्षिक महंगाई दर में 2.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. संस्था का अनुमान है कि 2027 की पहली तिमाही में महंगाई उसकी युद्ध से पहले की गई भविष्यवाणी की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक रहेगी. बढ़ती महंगाई की वजह से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड (ट्रेजरी सिक्योरिटीज) पर ब्याज दरें भी बढ़ने की संभावना है.
रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई में कांग्रेस को सूचित किया था कि सितंबर तक ईरान के खिलाफ अभियानों की लागत 37.5 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी. वहीं, व्हाइट हाउस ने 87.6 अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है, जिसमें से 67.1 अरब डॉलर पेंटागन के लिए हैं. सीबीओ के विश्लेषण के अनुसार, पेंटागन की ओर से मांगी गई राशि में से लगभग 42.3 अरब डॉलर सीधे तौर पर इस संघर्ष से जुड़े खर्चों के लिए दिखाई देते हैं.
यह रिपोर्ट अमेरिका की आर्थिक और सैन्य सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है. मिसाइल-रक्षा भंडार में कमी और बढ़ती महंगाई भविष्य में देश के लिए बड़ी चुनौतियां पेश कर सकती है. खासकर तब, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और चीन जैसे देशों के पास बड़ी संख्या में मिसाइलें हैं. इस स्थिति में, अमेरिका को अपनी रक्षा तैयारियों और आर्थिक स्थिरता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है.