मनोज जरांगे पाटिल की मुंबई भूख हड़ताल पर महाराष्ट्र सरकार का रुख, गणेशोत्सव के कारण चिंता

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Navbharat Times
मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल की प्रस्तावित भूख हड़ताल से तनाव बढ़ गया है। महाराष्ट्र के बड़े नेताओं ने गणेशोत्सव से पहले शांति बनाए रखने की अपील की है। जरांगे पाटिल के मुंबई के आजाद मैदान की ओर रवाना होने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने की चिंता जताई।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार ने जरांगे पाटिल की 14 में से 12 मांगों को मान लिया है और बाकी मांगों पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय ऐसे फैसले नहीं होने चाहिए जिससे जनता को परेशानी हो। पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। जरांगे पाटिल का मुंबई में आंदोलन करने का शुरुआती आवेदन पहले ही खारिज कर दिया गया था। अगर वे नया आवेदन देते हैं तो उस पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव मुंबई और पुणे में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और उम्मीद है कि इसमें कोई बाधा नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन आम बात है और जरांगे पाटिल पहले भी प्रदर्शन कर चुके हैं।
उप-मुख्यमंत्री शिंदे ने आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक रंग न देने की सलाह दी। उन्होंने त्योहारों के दौरान होने वाली दिक्कतों पर चिंता जताई। शिंदे ने कहा कि गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना सरकार का फर्ज है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी 58 मराठा रैलियां शांतिपूर्ण ढंग से हुई थीं और जनता को कोई परेशानी नहीं हुई थी। अब भी सभी को ऐसा ही संयम बरतना चाहिए। शिंदे ने कहा कि लोकतांत्रिक आलोचना ठीक है, लेकिन वह जनहित पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा आरक्षण के मामले में हमेशा सकारात्मक और खुले विचारों वाली रही है। वे उम्मीद करते हैं कि दूसरा पक्ष भी बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के ऐसा ही रचनात्मक रवैया अपनाएगा।

मनोज जरांगे पाटिल, जो मराठा आरक्षण के प्रबल समर्थक हैं, ने मुंबई में भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य के शीर्ष नेता, जिनमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शामिल हैं, ने जरांगे पाटिल से गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहार के दौरान अपनी हड़ताल स्थगित करने का आग्रह किया है। नेताओं का कहना है कि त्योहारों के इस व्यस्त मौसम में किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और आम जनता को असुविधा हो सकती है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार जरांगे पाटिल की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर चुकी है। उन्होंने बताया कि 14 मुख्य मांगों में से 12 पर सरकार सहमत हो गई है और शेष मांगों पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जरांगे पाटिल के मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन करने के शुरुआती आवेदन को पुलिस ने खारिज कर दिया था। हालांकि, अगर वे कोई नया आवेदन प्रस्तुत करते हैं, तो उस पर जरूर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गणेशोत्सव जैसे महत्वपूर्ण त्योहारों के दौरान जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

उप-मुख्यमंत्री शिंदे ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। शिंदे ने कहा कि सरकार का यह कर्तव्य है कि वह गणेशोत्सव के दौरान सभी श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखे। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी मराठा समुदाय की ओर से कई रैलियां शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई हैं, जिनसे जनता को कोई दिक्कत नहीं हुई। इसलिए, इस बार भी सभी को संयम बरतना चाहिए। शिंदे ने यह भी कहा कि सरकार हमेशा से ही मराठा आरक्षण के मुद्दे पर सकारात्मक रही है और वे उम्मीद करते हैं कि जरांगे पाटिल भी बिना किसी राजनीतिक एजेंडे के रचनात्मक तरीके से अपनी बात रखें।

यह पूरा मामला मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण दिलाने की मांग से जुड़ा है। मनोज जरांगे पाटिल इस मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुंबई में प्रस्तावित भूख हड़ताल को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। त्योहारों के नजदीक आने के कारण सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर विशेष सतर्क है।

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