नागौर: मुंडवा नगर परिषद में आरएलपी की अलका कंदोई दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित, भाजपा को झटका
नागौर: मुंडवा नगर परिषद में आरएलपी की अलका कंदोई दूसरी बार अध्यक्ष निर्वाचित, भाजपा को झटका
NewsPoint•
नागौर जिले की मुंडवा नगर परिषद में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की अलका कंदोई लगातार दूसरी बार अध्यक्ष चुनी गई हैं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत को एक वोट से हराया, जबकि भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार गीता को एक भी वोट नहीं मिला। यह परिणाम चौंकाने वाला रहा क्योंकि भाजपा 10 पार्षद सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और उसके पास कुल 14 पार्षदों का समर्थन था, जो अध्यक्ष पद जीतने के लिए पर्याप्त था।
मुंडवा नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव में आरएलपी की अलका कंदोई ने बाजी मारी है। उन्हें कुल 13 वोट मिले, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत को 12 वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ ही आरएलपी ने लगातार दूसरी बार इस पद पर अपना कब्जा बनाए रखा है। यह चुनाव कई मायनों में खास रहा, खासकर भाजपा के लिए, जिसकी आधिकारिक उम्मीदवार गीता को एक भी वोट नहीं मिला।भाजपा के लिए यह परिणाम एक बड़ा झटका है। हालांकि भाजपा ने 10 पार्षद सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और भाजपा समर्थित चार निर्दलीय पार्षदों के साथ उसके पास कुल 14 पार्षदों का समर्थन था। अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए केवल 11 वोटों की आवश्यकता थी। इसके बावजूद, भाजपा अपनी आधिकारिक उम्मीदवार को जिताने में नाकाम रही।
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि भाजपा की आधिकारिक उम्मीदवार गीता को एक भी वोट नहीं मिला। यह तब हुआ जब भाजपा 10 पार्षद सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और उसके पास कुल 14 पार्षदों का समर्थन था। अध्यक्ष पद के लिए केवल 11 वोटों की जरूरत थी।
दरअसल, भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद घनश्याम सदावत ने बगावत कर दी थी और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। भाजपा ने पहली बार पार्षद चुनी गईं गीता को घनश्याम सदावत और रमाकांत शर्मा जैसे नेताओं पर तरजीह दी थी, जो भाजपा के इस फैसले पर भारी पड़ा।
आरएलपी ने इस चुनाव में सात पार्षद सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के तीन पार्षद जीते थे। आरएलपी और कांग्रेस के खेमे को भाजपा के एक बागी पार्षद का भी समर्थन मिला, जिससे उनके पार्षदों की कुल संख्या 11 हो गई थी, जो बहुमत के लिए पर्याप्त थी। हालांकि, अंतिम मतदान में अलका कंदोई को 13 वोट मिले, जो उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए काफी थे।
यह परिणाम मुंडवा निकाय चुनाव के सबसे अप्रत्याशित नतीजों में से एक रहा। इससे पहले राजस्थान के 32 निकायों में चुनाव निर्विरोध संपन्न हो चुके थे, जिनमें भीलवाड़ा और भरतपुर नगर निगम भी शामिल थे।