असम में इसरो की इस्ट्रैक एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी का भूमि पूजन, वैज्ञानिक ढांचे को मिलेगी मजबूती
असम में इसरो की इस्ट्रैक एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी का भूमि पूजन, वैज्ञानिक ढांचे को मिलेगी मजबूती
NewsPoint•
गुवाहाटी, 21 सितंबर। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को चंद्रपुर में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस्ट्रैक एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। यह सुविधा अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की निगरानी और ट्रैकिंग को बेहतर बनाने के भारत के प्रयासों को मजबूती देगी और असम के वैज्ञानिक व तकनीकी ढांचे को मजबूत करेगी। यह इसरो के 'नेटवर्क फॉर स्पेस ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग एंड एनालिसिस' कार्यक्रम का हिस्सा है।
इसरो की यह नई एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी असम के चंद्रपुर में स्थापित की जा रही है। इस सुविधा के बनने से भारत की अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा की क्षमता बढ़ेगी। यहां आधुनिक रडार सिस्टम और ऑप्टिकल टेलीस्कोप लगाए जाएंगे। इनकी मदद से अंतरिक्ष में घूम रही चीजों को ट्रैक किया जाएगा और अंतरिक्ष की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। असम सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए करीब 200 बीघा जमीन दी है। इस कदम से भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में असम की भागीदारी और बढ़ेगी।भूमि पूजन के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी के लिए असम को चुनने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसरो के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। सीएम सरमा ने कहा, "इस केंद्र की स्थापना से असम देश के अंतरिक्ष अनुसंधान के नक्शे पर आएगा।" उन्होंने आगे कहा कि यह राज्य के वैज्ञानिक ढांचे को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को विज्ञान, टेक्नोलॉजी और संस्थागत विकास के क्षेत्र में असम के लिए नए अवसरों की शुरुआत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने असम की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य अशांति के पुराने दौर से आगे बढ़ चुका है। अब राज्य में नए संस्थान स्थापित हो रहे हैं और लोगों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर में बनने वाली यह सुविधा अंतरिक्ष विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में असम के नए दौर में प्रवेश का प्रतीक है। उन्होंने राज्य के भविष्य को बेहतर बनाने में आधुनिक वैज्ञानिक ढांचे की अहम भूमिका पर भी जोर दिया।
यह परियोजना भारत की अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की ट्रैकिंग और निगरानी को बेहतर बनाने की कोशिशों को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही, असम देश के रणनीतिक वैज्ञानिक ढांचे के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में स्थापित होगा। यह सुविधा अंतरिक्ष में कचरे (जैसे पुराने सैटेलाइट के टुकड़े) और सक्रिय सैटेलाइट की लगातार निगरानी करेगी, जिससे भविष्य में होने वाली अंतरिक्ष दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी। यह भारत को अंतरिक्ष में अपनी स्थिति मजबूत करने और अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगा।
इसरो की यह नई फैसिलिटी न केवल भारत की अंतरिक्ष सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि असम में वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के लिए नए रास्ते भी खोलेगी। इससे स्थानीय युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर मिलेंगे और राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना असम को राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी और राज्य के समग्र विकास में योगदान देगी।