जय मीणा ने एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस का पहला ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा

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Navbharat Times
भारतीय सॉफ्ट टेनिस खिलाड़ी जय मीणा ने 23 सितंबर को एशियन गेम्स में पुरुषों के सिंगल्स इवेंट में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह भारतीय सॉफ्ट टेनिस का पहला मेडल है। मीणा ने एशियन गेम्स में यह उपलब्धि हासिल करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वादा किया कि अगर 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सॉफ्ट टेनिस को शामिल किया गया, तो भारत सभी पांच गोल्ड मेडल जीतेगा। उन्होंने यह बयान सेमीफाइनल में जापान के ताकुया कुरोसाका से हार के बाद दिया। इससे पहले उन्होंने क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए शेरविन नुगुइट को हराया था।

मीणा ने अपने आत्मविश्वास को दर्शाते हुए कहा, "अगर 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स में सॉफ्ट टेनिस को शामिल किया जाता है, तो मैं यह बात सभी के सामने कहना चाहता हूं। मैं आपसे वादा करता हूं। मैं व्यक्तिगत रूप से हमारे प्रधानमंत्री से वादा करता हूं कि सॉफ्ट टेनिस में पांचों गोल्ड मेडल भारत के नाम होंगे।" उनका यह विश्वास उनकी टीम और खेल के प्रतिवर्ष में कठिन परिश्रम का नतीजा है।
28 वर्षीय मीणा ने सरकार से अपील की कि वे सॉफ्ट टेनिस का समर्थन जारी रखें। उन्होंने बताया कि सॉफ्ट टेनिस को खेलने के लिए नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता नहीं है। यह लॉन टेनिस कोर्ट पर खेला जा सकता है, चाहे वो ग्रास, क्ले या सिंथेटिक हो। उन्होंने कहा, "आपके पास होटल, रहने की जगह और कोर्ट पहले से मौजूद हैं। इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए और क्या चाहिए?"

मीणा ने इस ब्रॉन्ज मेडल को सभी भारतीय खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने गर्व से कहा, "मुझे गर्व है कि मैं यह मेडल जीतने वाला पहला भारतीय हूं। यह मेडल भारत में बदलाव लाएगा। अब हर भारतीय मेडल जीतने का सपना देख सकता है।" उनका मानना है कि अब सॉफ्ट टेनिस के विकास में तेजी आएगी।

इस मेडल को हासिल करने के लिए भारतीय टीम ने कई कठिनाइयों का सामना किया। पहले, वे 18 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ पुरुषों की टीम इवेंट में क्वार्टर फाइनल से बाहर हो गए थे। इसके बाद मीणा और उनकी साथी खिलाड़ी आध्या तिवारी मिक्स्ड डबल्स इवेंट के प्री-क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं। उन्होंने कहा, "यह मेडल जरूरी था, क्योंकि मैंने और मेरी टीम ने बहुत बुरे दिन देखे हैं। इस मेडल ने हमारी नींद, शांति और पूरे परिवार की मानसिक सेहत पर असर डाला था।"

मीणा ने आगे बताया कि उन्हें पता था कि इस बार सरकार ने उन्हें पूरा सपोर्ट दिया है। उन्होंने कहा, "तिरंगा सिर्फ एक मेडल और झंडा नहीं है। यह लाखों लोगों की उम्मीद है। हर एक जीत अपने देश का मान बढ़ाता है।"

जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 के बाद यह मीणा का तीसरा एशियन गेम्स था। उन्होंने कहा, "यह ब्रॉन्ज मेडल मेरे कोच, फेडरेशन, टीम के साथियों और सरकार की मेहनत का फल है।" वे अपने कोच और सरकार का धन्यवाद करते हुए बोले, "सरकार ने हमें बहुत सपोर्ट दिया है। हमें इक्विपमेंट, कैंप और ट्रेनिंग की जरूरत थी। इसलिए, मेडल जीतना हमारा फर्ज था। मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं भारत को यह मेडल दिला पाया।"

ईश्वर की कृपा से उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की और कोर्ट पर जीत की खुशी आंसू बनकर छलक पड़ी। उन्होंने कहा, "हमने तिरंगा लहराया। मेरे लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं है।"

मीणा की यह जीत न केवल उनके लिए, बल्कि सॉफ्ट टेनिस खेल के लिए भी एक नई आशा और दिशा है। उनका विश्वास है कि यदि और खिलाड़ी इस खेल को अपनाएंगे, तो भारत का सॉफ्ट टेनिस का भविष्य उज्ज्वल होगा। जय मीणा का एक सपना सिर्फ अपना मेडल जीतना नहीं है, बल्कि अपने देश को गर्व महसूस कराना है।

इस तरह, जय मीणा की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन गई है। उनकी मेहनत और लगन ने साबित कर दिया है कि आत्मविश्वास और समर्पण से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

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