भारत और चीन के बीच होतान एयर रूट की बातचीत शुरू, पाकिस्तान एयरस्पेस बंद होने से प्रभावित उड़ानें

NewsPoint•
Navbharat Times
पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस बंद करने का बेहद गंभीर असर हो रहा है। भारतीय एयरलाइंस को यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने के लिए अब लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। पाकिस्तान के एयरस्पेस से होकर जाने वाले रूट के बजाय उन्हें अरब सागर और मस्कट के रास्ते जाना पड़ रहा है। इससे कई उड़ानों का सफर लगभग 45 मिनट से 2 घंटे तक लंबा हो गया है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए भारत ने चीन के साथ शिनजियांग के होतान क्षेत्र से एक नया एयर कॉरिडोर बनाने पर चर्चा करना शुरू कर दिया है।

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि "29 सितंबर को बताया कि दोनों देशों के बीच इस रूट को लेकर चर्चा जारी है।" हालांकि इस रूट के शुरू होने की कोई निश्चित तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। अभी तक भारत-चीन के बीच इस पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
अब बात करें प्रस्तावित होतान एयर रूट की। यदि यह रूट शुरू होता है, तो दिल्ली और मुंबई से जाने वाली उड़ानें लेह की दिशा में बढ़ेंगी। इसके बाद यह विमान होतान के पास चीनी एयरस्पेस में दाखिल होंगे और वहां से किर्गिस्तान की ओर बढ़ते हुए यूरोप, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका के मौजूदा हवाई मार्गों से जुड़ सकेंगे। इस रूट का उद्देश्य पाकिस्तान के एयरस्पेस से बचना और उड़ान की दूरी और परिचालन लागत में कमी लाना है।

पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से पहले, बहुत सारे भारतीय विमान यूरोप और पश्चिमी देशों के लिए इसी रूट का इस्तेमाल करते थे। अब उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत से उड़ान भरने वाली कई एयरलाइंस को वैकल्पिक रूट अपनाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Air India पर लंबे रूट के कारण आर्थिक दबाव बढ़ा है। पूर्व एयर इंडिया CEO कैंपबेल विल्सन ने 2025 में बताया था कि "पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद रहने के कारण एयरलाइन को करीब 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।"

इस लंबे रूट के कारण ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ गई है। इसके साथ ही, बातचीत से लेकर रूट की शुरुआत में लगने वाला समय भी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत और चीन के बीच होतान एयर रूट को लेकर बातचीत पिछले एक साल से चल रही है। विदेश मंत्रालय भी इस मुद्दे पर चीनी अधिकारियों के साथ संपर्क में है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चीन कब भारतीय विमानों को इस एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति देगा।

किसी भी नए एयर कॉरिडोर के शुरू करने के लिए, दोनों देशों के बीच सहमति पर काम करना होगा। इसमें एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और अन्य परिचालन व्यवस्थाओं को भी शामिल किया जाना है। इससे पहले, पाकिस्तान ने 26 फरवरी 2019 को बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। इसके कारण भारतीय एयरलाइंस को कई महीनों तक लंबे वैकल्पिक रूट से उड़ानें संचालित करनी पड़ी थीं। हालांकि, 16 जुलाई 2019 को पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस पुनः खोल दिया था।

वर्तमान स्थिति में भी भारत वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है। यदि होतान कॉरिडोर पर बातचीत सफल होती है तो यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने के लिए भारतीय उड़ानों के लिए एक नया विकल्प बन सकता है। लेकिन फिलहाल, इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

पूरे मामले का सार यह है कि पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने से भारतीय एयरलाइंस पर काफी असर पड़ा है और नई एयर कॉरिडोर के लिए बातचीत चल रही है। यदि यह सफल होती है, तो बहुत कुछ बदल सकता है। लेकिन अभी बिना अंतिम निर्णय के, सभी को इंतजार करना होगा।

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