यशस्वी जायसवाल का भाई तेजस्वी क्रिकेट में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं
यशस्वी जायसवाल का भाई तेजस्वी क्रिकेट में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं
NewsPoint•
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट का एक सितारा, यशस्वी जायसवाल, अपने भाई तेजस्वी के लिए गर्व का विषय बने हुए हैं। यशस्वी ने गोल्डन प्रदर्शन से क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाया है। आज वह टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक है और वनडे टीम में भी ओपनर के विकल्प पर चर्चा में है। तेजस्वी, जो अब 29 साल के हो चुके हैं, ने अपने भाई की सफलता को बहुत गर्व के साथ देखा है। उन्होंने कहा, "मुझे बहुत गर्व है कि मेरा भाई भारत के लिए खेल रहा है। यह हर किसी का सपना होता है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"
यशस्वी का पहला वनडे शतक 6 दिसंबर, 2025 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ विशाखापत्तनम में आया था। उसी दिन तेजस्वी ने त्रिपुरा के लिए अपनी पहली टी20 फिफ्टी भी बनाई थी। इस संयुक्त उपलब्धि ने उनके माता-पिता को बहुत खुश किया। उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता बहुत खुश थे कि उस दिन उनके दोनों बेटों ने अच्छा खेला। यह हमारे लिए बहुत अच्छा एहसास था।"तेजस्वी ने यशस्वी के बड़े खिलाड़ी बनने के सपने को पूरा करने में मदद करने के लिए खुद क्रिकेट खेलने का सपना छोड़ दिया था। उन्होंने एक स्पोर्ट्स मैगजीन को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने दिल्ली में एक सेल्समैन के तौर पर काम किया। उन्होंने कहा, "यशस्वी का सपना जारी रखने में मदद करने के लिए मैंने वह काम किया।" जब यशस्वी क्रिकेट में सेटल हो गए, तब तेजस्वी को अपने करियर की नई शुरुआत मिली। वे त्रिपुरा के लिए अब घरेलू क्रिकेट में सभी फॉर्मेट खेल चुके हैं।
कोच ज्वाला सिंह ने तेजस्वी को त्रिपुरा के लिए खेलने का सुझाव दिया। तेजस्वी ने अब तक पांच फर्स्ट-क्लास मैच, आठ लिस्ट-ए और चार टी20 मैच खेले हैं। सभी फॉर्मेट में उन्होंने तीन फिफ्टी भी लगाई हैं। तेजस्वी ने कहा, "यशस्वी और ज्वाला सर (उनके कोच) ने मुझसे त्रिपुरा जाकर फिर से क्रिकेट खेलना शुरू करने को कहा। इसी कारण मैंने वहां से शुरुआत की।"
अभी तेजस्वी उत्तराखंड प्रीमियर लीग (यूपीएल) में खेल रहे हैं। उन्होंने टिहरी टाइटन्स के लिए चार मैचों में 117 रन बनाए हैं। इसमें एक मैच में 19 गेंदों में बनाए गए 50 रनों की तूफानी पारी भी शामिल है। इस लीग में उन्हें 'आइकन प्लेयर' माना जा रहा है। तेजस्वी ने कहा, “मैंने मिडिल ऑर्डर और टॉप ऑर्डर, दोनों में खेला है। मुझे बैटिंग ऑर्डर की परवाह नहीं है।”
उन्हें अपनी बल्लेबाजी में उच्चतम प्रदर्शन करने के लिए अलग-अलग गेंदबाजों के खिलाफ खुद को ढालना पड़ता है। उन्होंने यूपीएल की तारीफ करते हुए कहा, "यह एक बहुत जरूरी लीग है। इसे आयोजन करने के लिए सीएयू (उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन) का धन्यवाद। यह यहां के युवाओं और हमारे लिए एक बहुत अच्छा मौका है।"
अपने भाई और परिवार की मदद के लिए कई वर्षों तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद तेजस्वी की वापसी एक चुनौती रह सकती थी। लेकिन उन्होंने कहा कि यह कठिन नहीं था। तेजस्वी ने अपनी वापसी के अनुभव को साझा करते हुए कहा, "जब मुझे वापसी का मौका मिला, तो मैं बहुत खुश था कि मुझे फिर से क्रिकेट खेलने को मिल रहा था।"
तेजस्वी अब त्रिपुरा से उत्तराखंड आ चुके हैं। वह अपनी नई टीम के लिए प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड में गोल्ड कप खेलने के दौरान उन्होंने दो शतक भी लगाए हैं। उन्होंने कहा, "मैं गोल्ड कप खेलने के लिए उत्तराखंड आया था ताकि मेरा यहां से खेलने के लिए सलेक्शन हो सके। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा और अब मैं यूपीएल में भी खेल रहा हूं।"
अब वह यूपीएल में अपनी खेल प्रतिभा दिखाने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं। यह उनके लिए सिर्फ एक और चुनौती नहीं, बल्कि अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर भी है। तेजस्वी का कहना है, "मैं यूपीएल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और देखते हैं आगे क्या होता है।"
इस तरह, दोनों भाईयों की क्रिकेट यात्रा और परिवार का समर्थन उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है। तेजस्वी का मेहनत और यशस्वी का शानदार प्रदर्शन दर्शाता है कि सच्ची मेहनत और समर्पण किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। अब ये दोनों भाई भारतीय क्रिकेट के नए सितारे बनने की दिशा में अग्रसर हैं।