सपा ने राज्यसभा के लिए रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी को मैदान में उतारा

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Navbharat Times
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव के समीप आते ही समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने अनुभवी नेता प्रो. रामगोपाल यादव और उद्योग व खेल प्रशासन से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी को अपनी ओर से उतारा है। यह चुनाव 16 अक्टूबर को होने जा रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दोनों प्रत्याशियों को नामांकन भरते समय विधानसभा परिसर में उपस्थित रहकर समर्थन दिया। चुनाव की प्रक्रिया में सपा को चुनौती तीसरी सीट को लेकर है, जिसके लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।

धनराज नाथवानी का नाम सुनते ही सियासत में खासी हलचल मच गई है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और 2010 से कंपनी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने वित्त, लेखा, मानव संसाधन और सुरक्षा समेत कई गैर-तकनीकी विभागों में जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा, वह रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (जीसीए) के अध्यक्ष भी हैं। नाथवानी की शैक्षिक पृष्ठभूमि भी बहुत मजबूत है। उन्होंने लंदन के रीजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई की और एमबीए किया है।
रामगोपाल यादव, जो पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, लंबे समय से राज्यसभा में सपा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें पार्टी में एक महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है। इस बार सपा ने नाथवानी जैसे नए चेहरे को भी तरजीह दी है, जो उद्योग और खेल प्रशासन में माहिर हैं।

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को होगा और उसी दिन मतगणना भी होगी। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। विधानसभा की मौजूदा संख्या के हिसाब से एक सदस्य के निर्वाचन के लिए 37 पहले वरीयता मतों की आवश्यकता होगी।

सपा को अपनी दो उम्मीदवारों को जीताने में कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। इससे चुनाव में पहले और दूसरे वरीयता मत भी महत्वपूर्ण हो जाएंगे। राज्यसभा चुनाव में विधायक प्राथमिकता के आधार पर मतदान करते हैं। यदि किसी उम्मीदवार के पास अतिरिक्त मत होते हैं, तो उनका स्थानांतरण और अगली वरीयताओं के मत भी важ होंगे।

सपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी तीसरे उम्मीदवार को उतारने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए उसे और विधायकों का सहयोग चाहिए होगा। पार्टी की रणनीति में उन विधायकों को अपने पाले में लाना शामिल है, जिन्होंने पिछले चुनावों में अलग रुख अपनाया था। सपा को उम्मीद है कि कुछ विधायक जो पहले भाजपा के समर्थन में वोट दिया था, इस बार उसके साथ वापस आ सकते हैं।

लेकिन इस बार भाजपा और उसके सहयोगियों के पास विधानसभा की पर्याप्त संख्या बल है। इसलिए तय है कि आठ सीटों के लिए मुकाबला भाजपा के पक्ष में होगा। यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक सक्रियता बढ़ जाएगी।

सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी के नामों के साथ राज्यसभा चुनाव की तस्वीर पहले ही स्पष्ट कर दी है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को लेकर स्थिति अभी भी अनिश्चित है। यह देखना है कि सपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो वह कैसे और किन विधायकों का समर्थन जुटाएगी।

इस चुनाव में मतदाताओं की रणनीति और मतपत्र की बाण की प्रक्रिया पर सभी की नजरें होंगी। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सपा अपने पुराने चेहरों और नए चेहरों का मिश्रण पेश कर रही है। भविष्य की राजनीति में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा अपने लिए कितनी सीटें हासिल कर पाती है और क्या वह अपनी रणनीति में सफल हो पाती है।

इस चुनाव में सर्वाधिक धारा यही है कि किस तरह सपा अपने समर्थन को बढ़ाने की कोशिश करेगी। राज्यसभा चुनावों में विधायकों की भूमिका अहम होती है और यही कारण है कि इस बार सपा ने तीसरे उम्मीदवार का नाम सुझाने पर विचार किया है।

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश में यह राज्यसभा चुनाव न केवल राजनीतिक सियासत का एक बड़ा मंच है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे पार्टियां अपना खेल खेलने की रणनीतियों में बदलाव करती हैं। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में सपा कितनी सफल होती है।

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