तेजस्वी जायसवाल का गर्व: भाई यशस्वी की क्रिकेट उपलब्धियों पर ली प्रतिक्रिया
तेजस्वी जायसवाल का गर्व: भाई यशस्वी की क्रिकेट उपलब्धियों पर ली प्रतिक्रिया
NewsPoint•
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट में यशस्वी जायसवाल का नाम इन दिनों चर्चाओं में है। यशस्वी अपने शानदार खेल के दम पर टीम इंडिया के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शुमार हो गए हैं। उनके भाई तेजस्वी भी अपनी सफलता को लेकर गर्व कर रहे हैं। यशस्वी ने भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बना ली है और वनडे वर्ल्ड कप 2027 में खेलने की दौड़ में शामिल हैं। तेजस्वी ने अपने भाई की उपलब्धियों पर खुशी जताते हुए कहा, "मुझे बहुत गर्व है कि मेरा भाई भारत के लिए खेल रहा है। यह हर किसी का सपना होता है। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।"
यशस्वी और तेजस्वी के बीच एक विशेष संयोग है। 6 दिसंबर, 2025 को यशस्वी ने अपनी पहली वनडे शतकीय पारी खेली थी, वहीं उसी दिन तेजस्वी ने त्रिपुरा की ओर से अपनी पहली टी20 फिफ्टी बनाई थी। तेजस्वी ने कहा, "मेरे माता-पिता बहुत खुश थे कि उस दिन उनके दोनों बेटों ने अच्छा खेला। यह हमारे लिए बहुत अच्छा एहसास था।"तेजस्वी ने युवा उम्र में ही अपने भाई को बड़ा खिलाड़ी बनाने के सपने को पूरा करने में योगदान दिया। इसके लिए उन्होंने खुद क्रिकेट खेलने का सपना छोड़ दिया। तेजस्वी ने बताया कि यशस्वी का सपना साकार करने के लिए उन्होंने दिल्ली में सेल्समैन के रूप में काम किया। जब यशस्वी ने खुद को स्थापित कर लिया, तब तेजस्वी ने अपने क्रिकेट करियर की नई शुरुआत की। अब वे त्रिपुरा के लिए घरेलू क्रिकेट खेल चुके हैं।
तेजस्वी की क्रिकेट यात्रा काफी रोचक है। उन्हें यशस्वी और कोच ज्वाला सिंह के कहने पर त्रिपुरा की टीम में खेलने का मौका मिला। उन्होंने अपने करियर में काफी अच्छे रिकॉर्ड बनाए हैं। उन्होंने राज्य के लिए पांच फर्स्ट-क्लास मैच, आठ लिस्ट-ए गेम और चार टी20 मैच खेले हैं। उन्होंने सभी फॉर्मेट में फिफ्टी बनाई है। तेजस्वी ने बताया, "यशस्वी और ज्वाला सर ने मुझसे त्रिपुरा जाकर फिर से क्रिकेट खेलना शुरू करने को कहा। इसी कारण मैंने वहीं से शुरुआत की।"
वर्तमान में, तेजस्वी उत्तराखंड प्रीमियर लीग में खेल रहे हैं। उन्होंने टिहरी टाइटन्स के लिए चार मैचों में 117 रन बनाए हैं, जिसमें हाल ही में 19 गेंदों में 50 रन भी शामिल हैं। वे टीम के 'आइकन प्लेयर' हैं और उन्हें टॉप और मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। तेजस्वी ने कहा, "मैंने मिडिल ऑर्डर और टॉप ऑर्डर, दोनों में खेला है। मुझे बैटिंग ऑर्डर की परवाह नहीं है। मुझे इस बात की परवाह है कि मैं मैच कैसे जिता सकता हूं और कैसे असरदार पारी खेल सकता हूं।"
तेजस्वी ने उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) को युवाओं के लिए एक अच्छा मौका बताया। उन्होंने कहा, "यह एक बहुत जरूरी लीग है। इसे आयोजित करने के लिए सीएयू (उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन) का धन्यवाद। यह यहां के युवाओं और हमारे लिए भी अच्छा प्रदर्शन करने और आगे बढ़ने का एक बहुत अच्छा मौका है।"
अपने भाई और परिवार के लिए कई सालों तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद जब तेजस्वी वापसी की, तो उन्होंने कहा कि वापसी करना मुश्किल नहीं था। वे काफी खुश थे कि उन्हें फिर से क्रिकेट खेलने का मौका मिला। तेजस्वी ने कहा, "यह बहुत मुश्किल नहीं था। जब मुझे वापसी का मौका मिला, तो मैं बहुत खुश था कि मुझे फिर से क्रिकेट खेलने को मिल रहा था।"
तेजस्वी अब त्रिपुरा से उत्तराखंड आ चुके हैं। वे उम्मीद कर रहे हैं कि वे आगे भी घरेलू क्रिकेट खेले। उत्तराखंड में गोल्ड कप में खेलते हुए उन्होंने दो शतक लगाए हैं। उन्होंने कहा, "मैं गोल्ड कप खेलने के लिए उत्तराखंड आया था ताकि मेरा यहां से खेलने के लिए सलेक्शन हो सके। मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा (गोल्ड कप में) और अब मैं यूपीएल में भी खेल रहा हूं। मैं यूपीएल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और देखते हैं आगे क्या होता है।"
तेजस्वी के क्रिकेट के प्रति लग्न और उनके भाई यशस्वी की सफलता ने उन्हें प्रेरित किया है। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे परिवार के सहयोग से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। यशस्वी की मदद से तेजस्वी ने अपने करियर की नई शुरुआत की है और अब वे खुद को साबित करने के लिए मेहनत कर रहे हैं।
इस तरह से दोनों भाइयों की क्रिकेट यात्रा और उनकी मेहनत ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई है। उम्मीद है कि दोनों भविष्य में और भी ऊँचाइयों को छुएंगे और भारतीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ेंगे।