भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में ऑपरेशनल तैयारियों और तकनीकी विकास पर चर्चा

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Navbharat Times
नई दिल्ली में आज भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस चल रही है। इस कॉन्फ्रेंस में भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय सेना के प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ शामिल हैं। यह बैठक नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने यहाँ समुद्री सुरक्षा के मौजूदा हालात और नौसेना की परिचालन स्थिति का आंकलन किया। उन्होंने कहा कि हमें समुद्री क्षेत्र में जो चुनौतियाँ हैं, उनके लिए उच्च स्तर की युद्धक तैयारी करनी होगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कमांडरों को यह बताया कि भारत की समुद्री जिम्मेदारियाँ बढ़ रही हैं और भारतीय नौसेना अब हिंद महासागर में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बन गई है। उन्होंने कहा, "नौसेना इस क्षेत्र में पहली प्रतिक्रिया देने वाली और भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार की भूमिका निभा रही है।" राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया के हालात का जिक्र करते हुए भारतीय नौसेना के ऊर्जा सुरक्षा में योगदान को रेखांकित किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भारतीय नौसेना को भारत की सामरिक क्षमता बढ़ाने वाली प्रमुख शक्ति बताया। उन्होंने तकनीक को तेजी से अपनाने, आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नौसेना के प्रयासों की सराहना की। जनरल सुब्रमणि ने कहा कि तकनीकी बदलाव को तेज करना जरूरी है। तीनों सेनाओं के बीच सूचना का आदान-प्रदान भी महत्वपूर्ण है।

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने भी कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। उन्होंने मौजूदा सुरक्षा स्थिति और चुनौतियों पर विचार साझा किए। उनकी बातचीत में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और एकीकृत जवाबी कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। जनरल सुब्रमणि और जनरल सेठ के बीच चर्चा में यह बताया गया कि भविष्य के युद्ध के स्वरूप बदल रहे हैं और इसमें संयुक्त अभियानों की आवश्यकता बढ़ रही है। इससे तीनों सेनाओं के बीच अनुभव साझा करना और तैयारियों को मजबूती देने पर बल दिया गया।

कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के बाकी सत्रों में परिचालन, सैन्य सामग्री, रसद, मानव संसाधन, प्रशिक्षण और नई तकनीकों जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें सैन्य बलों के स्तर को ऊंचा करने, युद्धक तैयारियाँ मजबूत करने और नई क्षमताओं के विकास की गति बढ़ाने के उपायों की समीक्षा की जाएगी।

इस प्रकार, भारतीय नौसेना की कमांडर्स कॉन्फ्रेंस न केवल वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों को समझने में मदद कर रही है, बल्कि आने वाले समय की रणनीतियों पर भी विचार कर रही है। यह सभी सैन्य प्रमुखों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है और भविष्य में सामरिक दृष्टिकोण को मज़बूत करता है। भारतीय नौसेना अब एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है, जहाँ वह अपनी तकनीकी और रणनीतिक क्षमताओं को युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुसार ढाल रही है।

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