भारत-बांग्लादेश रक्षा सहयोग मजबूत: उच्चायुक्त प्रणय वर्मा और पीएम के रक्षा सलाहकार की अहम बैठक

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भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा और विदेश संबंध मजबूत हुए हैं। भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार से मुलाकात की। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में अपने बांग्लादेशी समकक्ष से भेंट की। इन मुलाकातों का उद्देश्य सुरक्षा सहयोग बढ़ाना और आपसी संबंधों को गहरा करना है।

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल: भारत और बांग्लादेश के बीच रक्षा और विदेश संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं। भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार से मुलाकात की, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में अपने बांग्लादेशी समकक्ष से मुलाकात की। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, आपसी संबंधों को गहरा करना और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना है। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में बांग्लादेश में नई सरकार बनी है और दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ढाका में, भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. ए.के.एम. शमसुल इस्लाम से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। दोनों अधिकारियों ने द्विपक्षीय परामर्श तंत्र, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और रक्षा संस्थानों के बीच सहयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया। भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया पर बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लगातार मजबूत करने के महत्व को दोहराया। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान बने अटूट रिश्तों को भी याद किया, जो साझा बलिदानों से पैदा हुए थे।
इस मुलाकात में, दोनों देशों ने अपने व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने साझा सुरक्षा चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई। भारतीय उच्चायुक्त ने बांग्लादेश सरकार के साथ आपसी हित और पारस्परिक लाभ के आधार पर बहुआयामी सहयोग को आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

इसी बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं को मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “आज दोपहर बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और उनके प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी कर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और सशक्त बनाने पर चर्चा की और क्षेत्रीय व वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। हम आपसी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।”

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान मंगलवार को एक \"गुडविल विजिट\" पर नई दिल्ली पहुंचे थे। ढाका ने इस यात्रा को भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों को और अधिक उत्पादक और सतत विकास के स्तर तक ले जाने के लिए एक \"महत्वपूर्ण नींव\" बताया है। यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि फरवरी में बीएनपी की सरकार बनने के बाद किसी बांग्लादेशी मंत्री का यह पहला भारत दौरा है। यह भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।

इससे पहले, मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान, हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते हिंसक हमलों और भारत विरोधी बयानों के कारण दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव आ गया था। ऐसे में, यह नई यात्रा संबंधों को पटरी पर लाने और उन्हें और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सोमवार को भी, बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की थी। उस मुलाकात में भी दोनों पक्षों ने मुख्य क्षेत्रों में आपसी जुड़ाव और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की थी। मीटिंग के दौरान, वर्मा ने साझा हित और आपसी फायदे पर आधारित \"सकारात्मक, कंस्ट्रक्टिव और आगे की सोच वाले नजरिए\" के जरिए संबंधों को गहरा करने की भारत की इच्छा जाहिर की थी। यह दर्शाता है कि भारत बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को लेकर बहुत गंभीर है और उन्हें हर संभव तरीके से मजबूत करना चाहता है। इन मुलाकातों से यह स्पष्ट है कि दोनों देश अपने संबंधों को नई दिशा देने और उन्हें और अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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