Eu mercosur Free Trade Agreement Vote For Legal Review Impact On Protectionism
यूरोपीय संघ-मर्कोसुर मुक्त व्यापार समझौता: कानूनी समीक्षा के लिए मतदान, संरक्षणवाद पर असर
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यूरोपीय संघ के सांसदों ने मर्कोसुर देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को फिलहाल रोक दिया है। सांसदों ने समझौते की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने समझौते को यूरोप की सर्वोच्च अदालत में भेजने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। अदालत यह तय करेगी कि समझौता यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार है या नहीं।
ब्रसेल्स, 21 जनवरी (एपी) यूरोपीय संघ (ईयू) के सांसदों ने बुधवार को दक्षिण अमेरिकी देशों के मर्कोसुर समूह के साथ एक बड़े मुक्त व्यापार समझौते को फिलहाल रोक दिया है। सांसदों ने इस समझौते की वैधता पर सवाल उठाए हैं। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुए मतदान में, यूरोपीय संघ के सांसदों ने यूरोपीय संघ-मर्कोसुर समझौते को यूरोप की सर्वोच्च अदालत में भेजने के प्रस्ताव को मामूली अंतर से स्वीकार कर लिया। अदालत यह तय करेगी कि यह समझौता यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार है या नहीं।
इस महत्वपूर्ण वोटिंग में 334 सांसदों ने समझौते की कानूनी जांच के पक्ष में वोट दिया, जबकि 324 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। 11 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। यह बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता शनिवार को ही लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में बढ़ रहे संरक्षणवाद और व्यापारिक तनाव के बीच वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत बनाना था।मर्कोसुर, जिसे दक्षिणी साझा बाजार भी कहा जाता है, लैटिन अमेरिका का एक क्षेत्रीय व्यापारिक समूह है। इसकी शुरुआत अर्जेंटीना, ब्राजील, पैराग्वे और उरुग्वे ने मिलकर की थी। बाद में वेनेज़ुएला और बोलीविया भी इसमें शामिल हो गए। इस समूह की स्थापना साल 1991 में हुई थी। इसका लक्ष्य सदस्य देशों के बीच सामान, सेवाएं, पैसा और लोगों की आवाजाही को आसान बनाना था।
यूरोपीय संघ के सांसदों की चिंताएं मुख्य रूप से पर्यावरण और मानवाधिकारों को लेकर थीं। उन्हें डर था कि मर्कोसुर देशों में इन मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसलिए, उन्होंने समझौते को आगे बढ़ाने से पहले कानूनी स्पष्टता चाही। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का माहौल है और देश अपने उद्योगों को बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं।
इस समझौते के रुकने से दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंधों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद ही आगे की दिशा तय हो पाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या निर्णय लेती है और क्या यह समझौता भविष्य में लागू हो पाता है या नहीं।