‘हमें नहीं चाहिए प्रीपेड मीटर’ जबरन क्यों थोपा जा रहा?

नवभारतटाइम्स.कॉम

बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की अनिवार्यता खत्म होने से उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को विकल्प चुनने का अधिकार दिया है। नोएडा में आरडब्ल्यूए इन मीटरों को हटाने और पुरानी पोस्टपेड व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रीपेड मीटरों से आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव बढ़ा है।

anger erupts against prepaid meters in noida consumers say we dont want it its being imposed forcefully

n NBT न्यूज, नोएडा

बिजली के प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की अनिवार्यता खत्म करने के फैसले ने उपभोक्ताओं को एक नई ऊर्जा दे दी है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 1 अप्रैल 2026 से नियमों में संशोधन करते हुए विकल्प चुनने का अधिकार उपभोक्ताओं पर छोड़ दिया है। इस बदलाव के बाद अब नोएडा में प्रीपेड मीटर के खिलाफ असंतोष का ज्वालामुखी फूट पड़ा है। सेक्टर-52 स्थित फोनरवा कार्यालय में आयोजित एनबीटी संवाद के दौरान शहर की विभिन्न आरडब्ल्यूए ने एक सुर में इन मीटरों को हटाने और वापस पोस्टपेड व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का तर्क है कि नोएडा का बिजली उपभोक्ता डिफॉल्टर नहीं है। यहां 99 प्रतिशत से अधिक राजस्व संग्रहण होता है, इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर प्रीपेड व्यवस्था थोपना अनुचित है। फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा ने बिजली विभाग पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तर्ज पर काम करने का आरोप लगाया। बैठक में सामने आया कि प्रीपेड मीटरों के कारण न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा है, बल्कि लोग भारी मानसिक तनाव में भी हैं। सेक्टर 39 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जीएस सचदेवा ने बताया कि उनके यहां एक पदाधिकारी का बिल 4.75 लाख रुपये आया है, जिसे विभाग दुरुस्त नहीं कर रहा। सेक्टर 55 के मंदिर का बिल 7 हजार से उछलकर 2 लाख पहुंच गया है। शिकायत है कि बैलेंस होने के बावजूद बिजली कट जाती है, सर्वर की खराबी से ऐप काम नहीं करता और फ्लक्चुएशन के दौरान मीटर की रीडिंग अचानक जंप कर जाती है। माइनस बैलेंस की पूर्व सूचना न मिलना और रिचार्ज के बाद भी घंटों बिजली बहाल न होना आम समस्या बन चुकी है।