फ्रेंकलिन डी रूजवेल्ट की गिनती 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली अमेरिकी राष्ट्रपतियों में होती है। उनके जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण दौर 1921 में आया, जब वह पोलियो से ग्रसित हो गए। उनके दोनों पैर लगभग नाकाम हो गए। लोग कहने लगे कि उनका राजनीतिक करियर समाप्त हो जाएगा, क्योंकि शारीरिक रूप से अक्षम होने के नाते वह सामाजिक जीवन में ज्यादा सक्रिय नहीं रह पाएंगे। लेकिन, रूजवेल्ट ने हार नहीं मानी। उन्होंने व्हीलचेयर का सहारा लिया, पर अपनी छवि एक आत्मविश्वासी और सक्रिय नेता की ही बनाए रखी। वह धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन में लौटे और लोगों का भरोसा फिर से जीता। आखिरकार वह अमेरिका के राष्ट्रपति बने और लगातार चार बार इस पद पर चुने गए, जो इतिहास में अद्वितीय है। ग्रेट डिप्रेशन के कठिन दौर में उन्होंने ‘न्यू डील’ जैसी योजनाओं से अर्थव्यवस्था को संभाला और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान प्रभावी नेतृत्व दिया। रूजवेल्ट का जीवन यह संदेश देता है कि शारीरिक अक्षमताएं सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और सकारात्मक सोच के बल पर इंसान हर चुनौती को अवसर में बदल सकता है।


