n गुनगुन शर्मा, नोएडा
सपना (बदला हुआ नाम) हाल ही में आरटीओ दफ्तर से अपना इंटरनैशनल ड्राइविंग लाइसेंस (IDP) लेकर निकलीं, तो उनके चेहरे पर एक अलग ही आत्मविश्वास था। वह कोई घूमने नहीं जा रही हैं, बल्कि यूरोप के एक शहर में अपनी नई नौकरी और करियर की शुरुआत करने जा रही हैं। सपना कहती हैं, वहां आत्मनिर्भर रहने और करियर में आगे बढ़ने के लिए खुद गाड़ी चलाना सबसे जरूरी है। यह कहानी सिर्फ सपना की नहीं है, बल्कि शहर की उन सैकड़ों महिलाओं की है जो अब सात समंदर पार सड़कों पर रफ्तार भरने और ड्राइविंग समेत अन्य करियर बनाने के लिए तैयार हैं।
शहर में विदेश जाकर वाहन चलाने का क्रेज जिस तरह बढ़ रहा है, उसने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बीते तीन वर्षों में कुल 5,573 लोगों ने इंटरनैशनल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां पहले IDP सिर्फ बिजनेस ट्रिप या घूमने के लिए लिया जाता था, वहीं अब कमर्शल वाहन चलाने और करियर बनाने वाले युवाओं की कतार लंबी है। इस दौड़ में शहर की महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
इसलिए बढ़ रहा आंकड़ा
जानकारों का मानना है कि विदेशों में 'गिग इकोनॉमी' और डिलिवरी सेक्टर से लेकर प्रोफेशनल जॉब्स में भी ड्राइविंग एक अनिवार्य स्किल बन गई है। महिलाएं अब इसे एक स्किल के रूप में देख रही हैं जो उन्हें विदेश में सुरक्षित और स्वतंत्र बनाता है। लगातार बढ़ते ये आंकड़े न केवल महिलाओं की आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आरटीओ कार्यालय में आईडीपी के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या उनके बढ़ते आत्मविश्वास और करियर-ओरिएंटेड सोच का सीधा प्रमाण है।


