जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की अर्जी खारिज की, कहा- फैसले दबाव में नहीं लिए जाते

नवभारतटाइम्स.कॉम

दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की खुद को अलग करने की अर्जी खारिज कर दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका दबाव में फैसले नहीं लेती। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अविश्वास के बीज बोने के लिए दरवाज़े नहीं खोले जा सकते। यह फैसला सीबीआई की चुनौती पर सुनवाई जारी रखेगा।

जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की अर्जी खारिज की, कहा- फैसले दबाव में नहीं लिए जाते

Prachi.Yadav @timesofindia.com

n दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति मामले में आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य द्वारा दायर खुद को अलग करने की अर्जी को खारिज कर दिया है। रेक्यूजल की लगभग सात अर्जियों पर सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा कि मनगढ़ंत कहानियों के सामने न्यायपालिका ‘झुकेगी या पीछे नहीं हटेगी’।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि अविश्वास के बीज बोने के लिए दरवाज़े नहीं खोले जा सकते और इन अर्जियों को न्यायपालिका संस्था को ही कटघरे में खड़ा करने की सीधी कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया। मामले से खुद को अलग करने के दबाव पर बात करते हुए, जस्टिस शर्मा ने कहा कि हालांकि खुद को अलग करने का आसान रास्ता चुपचाप बाहर निकलने का मौका देता, लेकिन ऐसा करना कर्तव्य से मुंह मोड़ना और हार मान लेना होता। एक जज की प्रतिष्ठा एक संस्थागत संपत्ति है, जो इतनी कमज़ोर नहीं हो सकती कि बिना किसी सबूत के ही झुक जाए। जज ने कहा कि कहा कि कोर्टरूम एक ऐसी जगह बनी रहनी चाहिए जहां शक का जवाब तर्क से मिले, न कि यह ‘धारणाओं का मंच’ बन जाए।

इस फैसले में आरोपों की प्रकृति पर तीखा निशाना साधा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी राजनेता की पत्नी राजनेता बन सकती है... तो यह कैसे कहा जा सकता है कि एक जज के बच्चे कानून के पेशे में नहीं आ सकते?

जस्टिस शर्मा ने कहा कि खुद को केस से हटाने की मांग करके, याचिकाकर्ता ने किसी भी नतीजे के लिए एक कहानी तैयार कर ली थी, अगर राहत नहीं मिलती, तो वह दावा करते कि जज पक्षपाती थे, अगर राहत मिल जाती, तो वह दावा करता कि कोर्ट ने दबाव में काम किया। लिहाजा, सीबीआई की उस चुनौती पर सुनवाई, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल और 22 अन्य को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है, जस्टिस शर्मा ही करती रहेंगी। जवाब दाखिल करने के लिए आरोपी व्यक्तियों को कोर्ट ने आखिरी एक मौका और दिया और सुनवाई के लिए 27 से 30 अप्रैल तक की तारीखें तय कर दीं।

वहीं, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल की टिप्पणी किसी भी न्यायाधीश की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली रही हैं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि केजरीवाल हमारी न्यायपालिका पर सवाल उठाकर पूरे सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।