n NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली
कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक लिमिटेड के बाकी 14 हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ( NCLAT ) को तुरंत फैसला लेने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि बाकी 14 प्रोजेक्ट्स अभी भी अनिश्चितता में हैं, जबकि इससे पहले 30 में से 16 प्रॉजेक्ट्स को सरकारी कंपनी एनबीसीसी को पूरा करने के लिए सौंपा जा चुका है। अदालत ने कहा कि वह मामले को प्राथमिकता पर सुने और सभी संबंधित पक्षों, जैसे ग्रेनो प्राधिकरण, भूमि स्वामी एजेंसियों और किसानों को भी सुनवाई का अवसर दे। पीठ ने स्पष्ट किया कि NCLAT यह तय करे कि क्या 14 प्रॉजेक्ट्स को भी दूसरी एजेंसी को सौंपा जा सकता है। अदालत का जोर इस बात पर है कि चाहे प्रॉजेक्ट्स पूरी हो चुकी हों, आंशिक रूप से बनी हों या पूरी तरह रुकी हों, सभी के लिए एक समान नीति और निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पहले 5 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के 12 दिसंबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें एनबीसीसी को सुपरटेक की 16 हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स पूरी करने का जिम्मा दिया गया था। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला दिया था। इन 16 परियोजनाओं में 49,748 घर शामिल हैं, जो यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में स्थित हैं। इनमें से 27,000 होमबायर्स घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कोर्ट ने पहले ही सभी ट्रिब्यूनलों और हाई कोर्ट्स को ऐसे आदेश पारित करने से रोका था, जिनसे एनबीसीसी द्वारा किया जाने वाला निर्माण कार्य प्रभावित हो। सुपरटेक ने 2010-12 के दौरान करीब 51,000 घरों की बुकिंग की थी, लेकिन वित्तीय संकट के चलते परियोजनाएं अटक गईं। कंपनी के खिलाफ 2021 में दिवाला कार्यवाही शुरू हुई थी। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 20 मार्च 2021 को IBC की धारा 7 के तहत 431 करोड़ से अधिक के बकाये का दावा करते हुए कार्यवाही शुरू कराई थी। अब निगाहें 24 अप्रैल की संभावित सुनवाई पर हैं, जब NCLAT मामले पर आगे विचार कर सकता है।





