प्रीपेड बिजली मीटर से मेंटिनेंस की कटौती पर भड़के निवासी

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आरजी रेजिडेंसी के निवासी प्रीपेड बिजली मीटर से हो रही मेंटिनेंस और पानी के बिल की कटौती से नाराज हैं। तीन महीने से यह कटौती जारी है। निवासियों को हर तीन-चार दिन में रिचार्ज कराना पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

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n NBT न्यूज, नोएडा

सेक्टर-120 स्थित आरजी रेजिडेंसी में प्रीपेड बिजली मीटर से मेंटिनेंस व अन्य चार्जों की कथित कटौती पर निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। रविवार देर शाम करीब 50 निवासी अपार्टमेंट ओनर्स असोसिएशन (AOA) कार्यालय पहुंचे और विरोध जताया। आरोप है कि तीन महीने बीतने के बाद भी प्रीपेड मीटर से कॉमन एरिया मेंटिनेंस (CAM) और पानी के बिल की दैनिक कटौती जारी है, जबकि अगले महीने से क्लब हाउस शुल्क जोड़ने का नोटिस भी जारी किया गया है। निवासियों का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि प्रीपेड बैलेंस से किस मद में कितनी राशि काटी जा रही है। कई परिवारों को हर तीन-चार दिन में लगभग 1000 रुपये का रिचार्ज कराना पड़ रहा है, अन्यथा बिजली कटने का डर बना रहता है। विरोध के दौरान अध्यक्ष और सचिव की अनुपस्थिति से आक्रोश बढ़ा। सूचना पर पुलिस पहुंची और मौजूद बोर्ड सदस्यों को दो दिन में समाधान निकालने के निर्देश दिए। निवासियों ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और संबंधित विभागों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार बिजली मद के अलावा अन्य शुल्क प्रीपेड मीटर से नहीं काटे जा सकते। साथ ही GBM की कार्रवाई और मतदान प्रक्रिया को लेकर भी डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में शिकायतें लंबित हैं। निवासियों ने अविलंब अवैध कटौती रोकने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। निवासियों का कहना है कि एओए ने इस निर्णय को जीबीएम में मंजूरी मिलने का दावा किया, जबकि कई फ्लैट ओनर्स का आरोप है कि बैठक में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। जब निवासियों ने वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य प्रमाण मांगे तो एओए ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। डिप्टी रजिस्ट्रार गाजियाबाद ने 6 मार्च को एओए से 15 दिन में साक्ष्य मांगे गए थे, लेकिन तय अवधि बीतने के बाद भी दस्तावेज जमा नहीं किए गए। निवासियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय सहित संबंधित विभागों को पत्र भेजकर अवैध कटौती पर रोक लगाने और एओए के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि तीन माह बीतने के बावजूद समाधान न मिलने से वे परेशान हैं और शीघ्र हस्तक्षेप चाहते हैं।