nNBT रिपोर्ट, लखनऊ : बुंदेलखंड की सदियों पुरानी चट्टानें अब भारत की 'तकनीकी आत्मनिर्भरता' की नई इबारत लिखने को तैयार हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने इस क्षेत्र में पारंपरिक खनिजों के साथ-साथ अब भविष्य की जरूरतों के लिए बेहद अहम 'क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स' की खोज तेज कर दी है।
सोमवार को GSI कार्यालय में 'बुंदेलखंड क्रेटॉन की खनिज संभावनाएं: महत्वपूर्ण खनिजों पर विशेष ध्यान' विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस में विशेषज्ञों ने बताया कि बुंदेलखंड में छिपे खनिज भंडार भारत की अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे। कार्यशाला की शुरुआत मुख्य अतिथि और GSI के महानिदेशक असित साहा ने वर्चुअली की। मौके पर जोयेश बागची और रजिंद्र कुमार भी मौजूद रहे।
संस्थान के राजेंद्र कुमार ने बताया कि GSI बुंदेलखंड क्षेत्र में फॉस्फोराइट, सोना, लोहा, जैसे खनिजों पर काम कर रही थी। हालांकि, साल 2026 के बाद से मुख्य फोकस क्रिटिकल मिनरल्स पर शिफ्ट हो गया है।





