प्रकृति की चेतावनी

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bhote koshi flood threat looms over india alert in up bihar danger to kailash yatris
उत्तरी नेपाल की भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ का खतरा भारत पर भी मंडरा रहा है। नेपाल की सीमा से लगते यूपी और बिहार के इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। कई मौतें हुई हैं, सैकड़ों लापता हैं और बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है। नेपाल को इस आपदा से उबरने में लंबा समय लगेगा।

बचाव । लापता लोगों में सौ से ज्यादा भारतीय नागरिक भी बताए जा रहे हैं, जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे। इन लोगों के बचाव और राहत अभियान के लिए नेपाल को बड़े पैमाने पर मदद की जरूरत है। भारत ने इस मौके पर फौरन कदम उठाए हैं। अभी प्राथमिकता प्रभावितों तक पहुंचना और जो इलाके संकट की जद में आ सकते हैं, वहां तैयारी करना है, लेकिन इसके साथ कुछ जरूरी सवाल भी पूछे जाने चाहिए।
अटकी परियोजनाएं । बिहार के लिए यह अनुभव नया नहीं। सीमापार से आने वाली कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी नदियां हर साल राज्य में बाढ़ की बड़ी वजह बनती हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश, भूस्खलन या ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं का असर उत्तरी बिहार तक पड़ता है। हालांकि दोनों देशों के बीच निगरानी और चेतावनी के लिए मैकेनिज्म है, लेकिन इसके साथ रुकी हुई परियोजनाओं को भी आगे बढ़ना होगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण सप्तकोसी हाई डैम परियोजना है, जो कोसी नदी पर प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण के साथ सिंचाई और बिजली उत्पादन भी है, लेकिन यह लंबे समय से फंसी हुई है।

पर्यावरण को नुकसान । दूसरा सवाल जुड़ा है पर्यावरण से। अनुमान है कि तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर फटने या भूस्खलन के कारण तबाही आई। हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी वजह है क्लाइमेट चेंज के कारण इस रीजन का बढ़ता तापमान। नेपाल के एक रिसर्च ग्रुप ने इसी साल अपनी रिपोर्ट में बताया था कि हिंदू कुश हिमालयी शृंखला के ग्लेशियर साल 2000 के बाद से दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि इसके बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों में इंसानी गतिविधियां जारी हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान बढ़ता जा रहा है।

सहयोग बढ़ाएं । करीब दो अरब लोग हिमालय से निकलने वाली नदियों के पानी पर निर्भर हैं। यह घटना प्रकृति की तरफ से चेतावनी भी है। दोनों देशों को जल प्रबंधन पर तेजी से बात आगे बढ़ाने की जरूरत है। रुके हुए प्रॉजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाए, राजनीतिक मतभेद अलग रखते हुए सहयोग बढ़ाया जाए। साथ ही, पर्यावरण को प्राथमिकताओं की सूची में ऊपर रखना होगा।

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