Pahadon Ka Season Cricket Match On Childrens Future In Parents teacher Meeting
पहाड़ों का सीजन
नवभारतटाइम्स.कॉम•
ज्यादातर बच्चे नरभसाए हुए से हैं। पैरंट्स भी उलझन में। मानो तय नहीं कर पा रहे हों कि अटैकिंग मोड में रहना है या डिफेंसिव में। टीचर पिच पर उतर रहे बल्लेबाजों का मुआयना कर रही हैं। गेंदबाजी की धार और फील्डिंग सेट करने में जुटी हैं।
पैरंट्स टीचर मीटिंग की इस गहमागहमी में पहला सवाल, 'गुड मॉर्निंग सर, आप बल्लू के फादर हैं? अब तक किसी मीटिंग में दिखे नहीं थे?' टीचर ने पहली ही गेंद ऑफ साइड पर ऐसी निकाली कि बल्लेबाज स्लिप में कैच होते-होते बचा। 'नहीं, असल में वो ऐसा है कि मम्मी आती रही हैं इसकी। मेरा कामकाज रहता है, तो आना नहीं हो पाता।' बल्लू बाश्शा के फादर ने लटपटाते हुए जान बचाई। 'यानी बल्लू की मम्मी निठल्ली हैं?' टीचर ने गुस्से में यॉर्कर डाल दी। बल्लू मन ही मन खुश हो रहा है, 'विकेट गया ही समझो अब। रास्ते भर मुझे समझाते आ रहे थे कि टीचर से ऐसी बात करनी चाहिए, क्लास में वैसे रहना चाहिए।''खैर, अब 19 का टेबल सुनाइए।' बल्लेबाज को पसीना आता देख टीचर ने LBW की अपील किए बिना अगली गेंद डाल दी। फादर सुन्न। बल्लू की ओर देखा। वह नॉन-स्ट्राइकर एंड पर मुस्कुरा रहा है। टीचर की नजर तो इधर है यानी पहाड़ा मुझे सुनाना है? फादर की जीभ तालू से चिपक गई। 'ये तो आप बच्चों को सिखाएंगी। पैरंट्स क्यों सुनाएंगे टेबल?' फादर ने आंख मूंदकर शॉट लगा दिया। बल्ला ऑन साइड की ओर गया, गेंद मिड ऑफ पर जा रही है। 'पहली क्लास के सिलेबस में 10 तक के टेबल्स हैं। आप लोगों ने ही प्रिंसिपल को लेटर लिखा था कि 20 तक के पहाड़े सिखाएं। जो खुद नहीं कर पाए, वो बच्चों से कराने की हुड़क लगी है आपको? शुरू हो जाइए।' टीचर का बाउंसर आया। विकेट उखड़ गया।