Khadi New Identity For Every District Strong Symbol Of Self reliant India
देश के हर ज़िले को नई पहचान दे सकती है खादी
नवभारतटाइम्स.कॉम•
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की आत्मा, आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान को नई दिशा देने की कोशिश की है। उन्होंने भारतीय परंपराओं को अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक शक्ति के रूप में देखा। ‘ वोकल फॉर लोकल ’ उनके इस विजन का उदाहरण है। यह स्थानीय उत्पादों के साथ कारीगर, किसान, उद्यमी और निर्माता के श्रम पर गर्व का आह्वान है। इसकी सशक्त अभिव्यक्ति खादी है, पूज्य बापू की विरासत।
एक जिला, एक विरासतइस साल 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री ने पिछले 12 बरसों की परिवर्तन यात्रा का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र की वृद्धि को लगभग पांच गुना बताया और इसे भारत की बढ़ती क्षमता और आत्मनिर्भरता से जोड़ा। यह केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं, उस सोच का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र अपनी क्षमता, श्रम और उत्पादों पर विश्वास करता है। यही ‘ आत्मनिर्भर भारत ’ और ‘विकसित भारत’ का मूल भाव है। कभी खादी स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक थी। आज यह रोजगार, महिला सशक्तीकरण, सतत विकास और स्थानीय से वैश्विक बनने की भारत की यात्रा की पहचान बन रही है। इसका पुनर्जागरण पीएम के नेतृत्व में खादी और ग्रामोद्योग में फिर जगा विश्वास और जनभागीदारी की कहानी है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ और ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए भारत की स्थानीय विरासत को आर्थिक शक्ति में बदलने की जरूरत है। इसी सोच के साथ मेरी अवधारणा 'एक जिला, एक विरासत' (EZEV) की है। इसके तहत हर जिले की कला, खादी, ग्रामोद्योग, पारंपरिक कौशल और उद्यमिता को आर्थिक पहचान दी जा सकती है। आधुनिक डिजाइन, डिजिटल तकनीक, ब्रैंडिंग और ई-कॉमर्स के जरिए स्थानीय विरासत को वैश्विक बाजार से जोड़कर हर कारीगर का सम्मान और हर विरासत को नई पहचान मिल सकती है।
पूनी संयंत्रों के आधुनिकीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना में सुधार से उत्पादन, गुणवत्ता, पारदर्शिता और विपणन को गति मिल रही है। पीएम मोदी ने खादी को स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ते हुए नागरिकों से स्थानीय उत्पाद अपनाने का आग्रह किया। उनकी ब्रैंड शक्ति से खादी एवं ग्रामोद्योग का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है, जिसे 2.51 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है। यह क्षेत्र 2 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। चरखे पर सूत कातने की मजदूरी 4 से बढ़कर 15 रुपये प्रति हैंक हुई है। यह परिवर्तन कारीगर केंद्रित नेतृत्व की प्राथमिकता दर्शाता है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्वदेशी की नई सोच बाजार से आगे बढ़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण, युवा उद्यमिता और पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही है। आज खादी चरखे तक सीमित नहीं, बल्कि फैशन, डिजाइन, डिजिटल कॉमर्स और वैश्विक बाजार का हिस्सा बन रही है। ‘खादी फॉर फैशन’ के आह्वान ने इसे नई पीढ़ी से जोड़ा है। ‘नए भारत की नई खादी’ Gen Z के बीच आधुनिक भारतीय पहचान, स्वदेशी गौरव और सतत जीवनशैली का प्रतीक बन रही है। कारीगरों के हाथों में पीढ़ियों का कौशल और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। इस शक्ति को सम्मान, बाजार और आधुनिक अवसरों से जोड़ना ही स्वदेशी के पुनर्जागरण की पूर्णता है।
भविष्य की संभावना है खादी
खादी का हर धागा कारीगर के परिश्रम, परिवार की आशा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से बुना जाता है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में खादी के पुनर्जागरण का अगला चरण ‘नई खादी’ है। यह केवल नए रंग, वस्त्र या बाजार नहीं, बल्कि परंपरा में नवाचार, विरासत में उद्यमिता, कौशल में तकनीक और स्थानीय उत्पादों में वैश्विक संभावनाओं का विस्तार है। नई खादी आत्मनिर्भरता, रोजगार, महिला सशक्तीकरण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण का प्रतीक है। NIFT के सहयोग से ‘सेंटर फॉर एक्सीलेंस फॉर खादी 2.0’ आधुनिक डिजाइन, अनुसंधान और फैशन नवाचार के जरिये खादी को नई पीढ़ी और नए बाजारों से जोड़ रहा है। यह साबित करता है कि परंपरा और आधुनिकता मिलकर भविष्य की शक्ति बन सकती हैं।
नई खादी का भविष्य युवाओं, आधुनिक जीवनशैली, वैश्विक फैशन और डिजिटल बाजारों में है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्वदेशी की भावना एक बार फिर जन-आंदोलन बनी है और खादी इसकी सशक्त पहचान। खादी अब केवल कपड़ा नहीं, भारतीयों के आत्मविश्वास, स्वदेशी चेतना और विकसित भारत के भविष्य की संभावना है।